0
डा. ज़रीना सानी का जन्म 5, जुलाई, 1936 को नागपुर शहर (महाराष्ट्र) में हुआ था | आपके पिता अब्दुल रहीम (चक्कीवाले) एक प्रगतिशील विचारक थे | उस समय जब लड़कियों को पढाना मुनासिब नहीं समझा जाता था तब भी वे लड़कियों की पढाई पर जोर देते थे और चाहते थे की उनकी बेटियों को ओपचारिक शिक्षा मिले | आप अपने स्कूली दिनों से ही लिखने में रूचि रखती थी | 16 वर्ष की आयु में आपकी पहली कहानी “मत्बुआ” बानो पत्रिका (नई दिल्ली, 1952) में छपी थी | आपने अपनी मेट्रिक तक की शिक्षा Government Girls High School, नागपुर से 1953 में पूरी की | उसी वर्ष 17 वर्ष की आयु में आपकी शादी कामठी के अब्दुल हलीम सानी के साथ कर दी गयी |

किसी भी महिला के लिए अपनी ससुराल से शिक्षा जारी रखने की अनुमति लेना आसान काम नहीं है परन्तु उन्होंने यह अनुमति प्राप्त कर ली और अगले ९ वर्षों में कला में स्नातक और दो उच्च्स्नातक डिग्री उर्दू और फारसी भाषा में नागपुर विश्विद्यालय से प्राप्त की | आप धार्मिक रूप से जागरूक थी और हमेशा महसूस करती थी की जिस भी धर्म का अनुसरण किया जाये पहले उस के बारे में सही जानकारी और समझ होनी चाहिए | इस तारतम्य में आपने नागपुर विश्वविद्यालय से बी.ए. के साथ-साथ उर्दू की “मौलवी अलीम”( junior diploma in oriental learning) और फारसी की मुंशी अलीम (senior diploma in oriental learning) परीक्षा पास की | यहाँ यह जानना जरुरी है की आपने धर्म को भगवान और भक्त के बीच का बेहद निजी मामला माना है | आपने अपनी शिक्षा को डा. सैयद रफ्फिउदीन के मार्गदर्शन में "सीमाब की नज़्म निगारी" थीसिस के रूप में 1969 में PhD कर पूरी की|
1958 में बी.ए. पास होने के बाद आपने अस्थायी शिक्षक के रूप में L.A.D. College में कार्य करना शुरू किया | सिर्फ दो वर्ष के अंतराल में आपको उर्दू विभाग के प्रमुख पद  (head of department) पर पदोन्नत किया गया | विभाग प्रमुख होने के अतिरिक्त आप advisory board ऑल इंडिया रेडियो, नागपुर, नागपुर विश्वविद्यालय बोर्ड स्टडीज (उर्दू और फारसी), DRC नागपुर विश्वविद्यालय की सदस्या और नागपुर विश्वविद्यालय उर्दू और फारसी के लिए पीएचडी गाइड भी थी | आपको महाराष्ट्र राज्य और बिहार राज्य उर्दू अकेडमी द्वारा अपनी किताब “सीमाब की नज़मिया शायरी”  के लिए सम्मानित किया गया |

अपनी शिक्षा के साथ, एक शिक्षक और माँ होते हुए भी आपने अपने लेखन के जूनून को कायम रखा | आपकी पहली किताब “उर्दू शायरी की हिन्दुस्तानी रूह” 1967 में प्रकाशित हुई बाद में आपकी चार और किताबे प्रकाशित हुई जिनमे “सीमाब की नजमिया शायरी”(1978), “बुढा दरख्त”(1979, मेहर लाल सोनी जिया फतेहाबादी की जीवनी), “सफ़दर आह ब-हैसियत शायर” (1979 ) शामिल है | आपकी आखिरी किताब “आइना-ए-ग़ज़ल” जो की डा. विनय वाईकर के साथ लिखी गयी थी 1983 में आपकी मृत्यु के बाद छपी | आपकी कुछ किताबे उर्दू साहित्य के विद्वानों पर अनुसंधान कार्य थे और बाकि आपकी शायरी पर किताबे थी | आपको आज़ाद ग़ज़ल और आज़ाद नज़म लिखने वाली आधुनिक शायरा के रूप में पहचाना गया |  आपने प्रारंभिक वर्षों में “ज़ारी” को तखल्लुस के तौर पर अपनाया और बाद में इसे “सानी” कर दिया | आपकी रचनाए भारत के अतिरिक्त पकिस्तान और ग्रेट ब्रिटेन की कई पत्रिकाओ में भी प्रकाशित हुई है |

अनुसंधान पर किताबे और शायरी के अतिरिक्त आपने कई लघुकथाए भी लिखी है जिनमे “कसूर अपना निकल आया”, “बादल तेरे सितम का”, “औरत की खुद्दारी”, “ख्याल अपना अपना”, "मुजरिम जमीर”, “एक किरण उजाले की”, और “फाटक” शामिल है |

14 जनवरी, 1982 को सिर्फ 45 वर्ष की उम्र में आपने अपनी आखिरी साँसे ली |

श्रीमती स्वाति सानी के सहयोग से ( www.zarinasani.org से साभार)

Post a Comment Blogger

 
Top