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एक गुडिया की कई कठपुतलियो में जान है,
आज शायर, ये तमाशा देखकर हैरान है |

खास सड़के बंद है तब से मरम्मत के लिए,
ये हमारे वक़्त कि सबसे सही पहचान है |

एक बुढा आदमी है मुल्क में या यों कहो-
इस अँधेरी कोठरी में एक रोशनदान है |

मरहलत आमेज़ होते है सियासत के कदम,
तू न समझेगा सियासत, तू अभी इंसान है |

इस कदर पाबन्दी-ए-मजहब कि सदके आपके,
जब से आजादी मिली है मुल्क में रमजान है |

कल नुमाइश में मिला वो चीथड़े पहने हुए,
मैंने पूछा नाम तो बोला हिन्दुस्तान है |

मुझमे रहते है करोडो लोग चुप कैसे रहू,
हर ग़ज़ल अब सल्तनत के नाम एक बयान है | - दुष्यंत कुमार
मायने
मस्लहत= सलाह/राज़, आमेज़=मिलने वाला/मिलाने वाला, सदके=न्योछावर, नुमाइश=मेला

Roman

ek gudiya ki kai kathputliyo me jaan hai
aaj shayar, ye tamasha dekhkar hairan hai

khas sadke band hai tab se marmmat ke liye
ye hamare waqt ki sabse sahi pahchan hai

ek budha aadmi hai mulk me ya yo kaho
is andheri kothri me roshandan hai

marhlat aamez hote hai siyasat ke kadam
tu n samjhega siyasat, tu abhi insan hai

is kadar pabandi-e-majhab ki sadke aapke
jab se aazadi mili hai mulk me ramzan hai

kal numaish me mila wo chithde pahne hue
maine pucha naam to bola hindustan hai

mujhme rahte hai karodo log chup kaise rahu
har ghazal ab saltanat ke naam ek bayan hai - Dushyant Kumar

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  1. तीसरा चौथा और छठा शेर तो कमाल है। बहुत अच्छी गज़ल पढवाने के लिये शुक्रिया।

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  2. सच में यह गज़ल तो मुझे भी काफी पसंद आई थी | आपका धन्यवाद प्रोत्साहित करने के लिए |

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