1

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है ?
तुम्ही कहो कि ये अंदाजे-गुफ्तगू क्या है ?

न शोले में ये करिश्मा न बर्क में ये अदा
कोई बताओ कि वो शोखे-तुंद-ख़ू क्या है ?

ये रश्क है की वो होता है हमसुखन तुमसे
वरगना खौफे-बद-अमोजिए-अदू क्या है

चिपक रहा है बदन लहू से पैरहन
हमारी जेब को अब हाजते-रफू क्या है

जला है जिस्म जहा दिल भी जल गया होगा
कुरेदते हो जो अब राख, जुस्तजू क्या है

रगों में दोड़ते-फिरने के हम नहीं काइल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है ?

वो चीज़ जिसके लिए हमको हो बहिश्त अज़ीज़
सिवाए वादा-ए-गुलफामे-मुश्कबू क्या है ?

पियू शराब अगर खुम भी देख लू दो चार
ये शीशा-ओ-कदह-ओ-कुजा-ओ-सुबू क्या है ?

रही न ताकते-गुफ्तार, और अगर हो भी
तो किस उम्मीद पे कहिये कि आरजू क्या है ?

बना है शह का मुसाहिब, फिरे है इतराता
वगरना शहर में ग़ालिब कि आबरू क्या है


मायने
करिश्मा=चमत्कार, बर्क=कटु स्वभाव का माशूक, खुम=मटके, शीशा-ओ-कदह-ओ-कुजा-ओ-सुबू=बोतल प्याले इत्यादि, ताकते-गुफ्तार=वाक़ शक्ति, खौफे-बद-अमोजिए-अदू=दुश्मन के सिखाने-पढ़ने का भय,

Post a Comment Blogger

 
Top