आदत - डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफरी

मुझे देखते ही तुम्हारे होंठों पर आ गई मुस्कान चेहरे खिल उठे रात रानी की तरह निगाहों में आ गई रेडियम सी चमक सांसें तेज़ हो गईं छुटी हुई कश्ती के तरंग की तरह... मैंने समझा ये सब तुम्हारा प्यार है जबकि यह सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी आदत थी.....

आदत

मुझे देखते ही
तुम्हारे होंठों पर आ गई मुस्कान
चेहरे खिल उठे रात रानी की तरह
निगाहों में आ गई रेडियम सी चमक
सांसें तेज़ हो गईं
छुटी हुई कश्ती के
तरंग की तरह...
मैंने समझा ये सब तुम्हारा प्यार है
जबकि यह सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम्हारी आदत थी.....
डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफरी


aadat

mujhe dekhte hi
tumhare hotho par aa gai muskan
chehre khil uthe raat rani ki tarah
nigaho me aa gai redium ki chamak
saanse tej ho gai
chhuti hui kashti ke
tarang ke tarah...
maine samjha ye sab tumhara pyar hai
jabki yah sirf aur sirf tumhari aadat thi
-Dr. Zia Ur Rehman Jafri

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