पतंग उड़ाने से पहले ये जान लेना था - शहराम सर्मदी

पतंग उड़ाने से पहले ये जान लेना था पतंग कट गई तो इस का इतना ग़म क्यूँ है पतंग उड़ाने से पहले ये जान लेना था

पतंग उड़ाने से पहले ये जान लेना था

पतंग उड़ाने से पहले ये जान लेना था
कि इस की असल है क्या और माहियत क्या है
बहुत नहीफ़ सी दो बाँस की खपंचें हैं

और उन से लिपटा मुरब्बे में ना-तवाँ काग़ज़
ये जिस के दम पे हवा में कुलेलें भरती है
ज़रा सी ज़र्ब से वो डोर टूट जाती है

पतंग कट गई तो इस का इतना ग़म क्यूँ है
पतंग उड़ाने से पहले ये जान लेना था
कि इस की असल है क्या और माहियत क्या है
~ शहराम सर्मदी


patang udane se pahle ye jaan lena tha

patang udane se pahle ye jaan lena tha
ki is ki asal hai kya aur mahiyat kya hai
bahut nahif si do bans ki khapanchen hain

aur un se lipta murabbe mein na-tawan kaghaz
ye jis ke dam pe hawa mein kulelen bharti hai
zara si zarb se wo dor tut jati hai

patang kat gai to is ka itna gham kyun hai
patang udane se pahle ye jaan lena tha
ki is ki asal hai kya aur mahiyat kya hai
- Shahram Sarmadi

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