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दिल माँगे है मौसम फिर उम्मीदों का - समीना राजा
दिल माँगे है मौसम फिर उम्मीदों का - समीना राजा

समीना राजा पकिस्तान की मशहूर लेखक, शायरा, शिक्षाविद थी | आप इस्लामाबाद में रहती थी | समीना राजा का जन्म बहवालपुर पकिस्तान में हुआ, आपने प...

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सूर्य से भी पार पाना चाहता है - विरेन्द्र खरे अकेला
सूर्य से भी पार पाना चाहता है - विरेन्द्र खरे अकेला

सूर्य से भी पार पाना चाहता है इक दिया विस्तार पाना चाहता है देखिए, इस फूल की ज़िद देखिए तो पत्थरों से प्यार पाना चाहता है किस क़दर है स...

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सारे मौसम बदल गए शायद - अलीना इतरत
सारे मौसम बदल गए शायद - अलीना इतरत

Aleena Itrat सारे मौसम बदल गए शायद और हम भी सँभल गए शायद झील को कर के माहताब सुपुर्द अक्स पा कर बहल गए शायद एक ठहराव आ गया कैसा...

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फिर बताओ कैसे सोच का विस्तार हो - अदम गोंडवी
फिर बताओ कैसे सोच का विस्तार हो - अदम गोंडवी

अदम गोंडवी के जन्मदिवस / जयंती पर उनकी एक ग़ज़ल पेश है : टी.वी. से अखबार तक गर सेक्स की बौछार हो फिर बताओ कैसे अपनी सोच का विस्तार हो ...

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 खूब पहचान लो 'असरार' हूँ मै ( मजाज़ लखनवी )
खूब पहचान लो 'असरार' हूँ मै ( मजाज़ लखनवी )

कल यानि १९ अक्टूम्बर को मजाज़ का जन्मदिवस था इस अवसर पर उन पर एक लेख है आशा है आप सभी को पसंद आएगा [ यह लेख मजाज़ पर लिखी गयी किताब मजाज़ और ...

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दीपावली पर कुछ अशआर
दीपावली पर कुछ अशआर

दीपो के पर्व दीपावली / दिवाली पर शायरो के कुछ अशआर : रो रहा था गोद में अम्माँ की इक तिफ़्ल-ए-हसीं इस तरह पलकों पे आँसू हो रहे थे बे-क...

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 इक दिया नाम का आज़ादी के - कैफी आज़मी
इक दिया नाम का आज़ादी के - कैफी आज़मी

दीपावली और दीपो के पर्व पर कैफी आज़मी साहब की यह नज़्म पेश है : एक दो भी नहीं छब्बीस दिए एक एक करके जलाये मैंने इक दिया नाम का आज़ादी के...

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मत पूछो कितना गमगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी - जाँन एलिया
मत पूछो कितना गमगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी - जाँन एलिया

मत पूछो कितना गमगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी ज्यादा मै तुमको याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी अपने किनारों से कह दीजो आंसू तुमको रोते है ...

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तुम अपनी खुदनुमाई की शौहरत के चाव में-  रईस फिगार
तुम अपनी खुदनुमाई की शौहरत के चाव में- रईस फिगार

तुम अपनी खुदनुमाई की शौहरत के चाव में। डालो न अपने हाथ को जलते अलाव में।। लहजा भी भूल बैठा है वो गुफ्तुगू का अब। लगता है जी रहा है वो भ...

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मेरे रश्क-ए-क़मर तुने पहली नज़र - फ़ना बुलंद शहरी
मेरे रश्क-ए-क़मर तुने पहली नज़र - फ़ना बुलंद शहरी

" मेरे रश्क-ऐ-कमर तेरी पहली नज़र " यह गीत या असल में यूँ कहे ग़ज़ल आपने जरुर सुनी होगी और कानो में इसकी धून आते ही गुनगुनाई भी होगी |...

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