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हद से ज्यादा भी प्यार मत करना - कमर एजाज़
हद से ज्यादा भी प्यार मत करना - कमर एजाज़

हद से ज्यादा भी प्यार मत करना दिल हर एक पे निसार मत करना क्या खबर किस जगह पे रुक जाये सास का एतबार मत करना आईने की नज़र न लग जाये इस ...

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सोच रहा है इतना क्यूँ   - शाहीद कमाल
सोच रहा है इतना क्यूँ - शाहीद कमाल

सोच रहा है इतना क्यूँ ऐ दस्त-ए-बे-ताख़ीर निकाल तू ने अपने तरकश में जो रक्खा है वो तीर निकाल जिस का कुछ अंजाम नहीं वो जंग है दो नक़्क़...

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समझता हूँ मैं सब कुछ सिर्फ़ समझाना नहीं आता - अख्तर अंसारी
समझता हूँ मैं सब कुछ सिर्फ़ समझाना नहीं आता - अख्तर अंसारी

समझता हूँ मैं सब कुछ सिर्फ़ समझाना नहीं आता तड़पता हूँ मगर औरों को तड़पाना नहीं आता ये जमुना की हसीं आवाज क्यूँ अर्गन बजाती हैं मुझे...

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अब तो ये भी नहीं रहा एहसास - जिगर मुरादाबादी
अब तो ये भी नहीं रहा एहसास - जिगर मुरादाबादी

अब तो ये भी नहीं रहा एहसास दर्द होता है या नहीं होता इश्क़ जब तक न कर चुके रुस्वा आदमी काम का नहीं होता टूट पड़ता है दफ़अ'तन जो...

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चलो चल कर वहीं पर बैठते हैं  - राज़िक़ अंसारी
चलो चल कर वहीं पर बैठते हैं - राज़िक़ अंसारी

चलो चल कर वहीं पर बैठते हैं जहां पर सब बराबर बैठते हैं न जाने क्यों घुटन सी हो रही है बदन से चल के बाहर बैठते हैं हमारी हार का ऐलान ह...

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