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नया  साल 2016 आने वाला है इस मौके पर पेश है मेहर लाल सोनी जिया फतेहाबादी साहब की एक नज्म

साल की आखिरी रात

ख़त्म होता है साल आ जाओ
दूर कर दो मलाल आ जाओ

भूल जाओ मेरे गुनाहों को
शब के नालों को दिन की आहों को

जो हुआ इस का ग़म फ़िज़ूल है अब
दास्तान ए अलम फ़िज़ूल है अब

नामुरादी का ज़िक्र जाने दो
कामरानी का दौर आने दो

आओ फिर बैठ जाओ पास मेरे
वलवले क्यूँ रहें उदास मेरे

आओ हम फिर पीएं पिलाएं कहीं
मौसम ए नौ का लुत्फ़ उठाएं कहीं

आओ फिर छेड़ दें शबाब का साज़
होनेवाला है साल ए नौ आग़ाज़

सर्द ओ तारीक और तवील है रात
अशरत ए सुबह की दलील है रात

आज की रात ग़म किसी को नहीं
रक्स करते है आस्मान ओ ज़मीं

ये सितारे जो झिलमिलाते हैं
प्रेम की रागनी सुनाते हैं- ज़िया फ़तेहाबादी

Roman

khatm hota hai saal aa jao
door kar do malal aa jao

bhul kar mere gunaho ko
shab ke naalo ko din ki aaho ko

jo hua is ka gham fizul hai ab
daastaan e alam fizul hai ab

namuradi ka zikr jaane do
kamrani ka dour aane do

aao fir baith jao paas mere
walwale kyu rahe udas mere

aao ham fir pie pilaye kahi
mousam e nou ka lutf uthaye kahi

aao fir chhed de shabab ka saaz
hone wala hai saal e nou aagaz

sard o tariq aur taweel hai raat
ashrat e subah ki dalil hai raat

aaj ki raat gham kisi ko nahi
raks karte hai aasmaan-o-zameen

ye sitare jo jhilmilate hai
prem ki ragni sunate hai - Zia Fatehabadi
#jakhira

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