मज़दूर - सीमाब अकबराबादी
मज़दूर गर्द चेहरे पर, पसीने में जबीं डूबी हुई आँसुओं में कुहनियों तक आस्तीं डूबी हुई पीठ पर नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त इक बार-ए-गराँ ज़ोफ़ से लर्ज़ी हुई सारे बदन की झुर्रियाँ हड्डियों में तेज़ चलने से चटख़ने की सदा दर्द में डूबी हुई मजरूह टख़ने की स…