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मज़दूर - सीमाब अकबराबादी

मज़दूर गर्द चेहरे पर, पसीने में जबीं डूबी हुई आँसुओं में कुहनियों तक आस्तीं डूबी हुई पीठ पर नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त इक बार-ए-गराँ ज़ोफ़ से लर्ज़ी हुई सारे बदन की झुर्रियाँ हड्डियों में तेज़ चलने से चटख़ने की सदा दर्द में डूबी हुई मजरूह टख़ने की स…

परिचय - सीमाब अकबराबादी

परिचय - सीमाब अकबराबादी सी माब अकबराबादी, अबू बक्र सिद्दीकी ( इस्लाम के पहले खलीफा ) के वंशज थे काकू गली, नई मंडी, आगरा इमलीवाले मकान में सन 1880 में पैदा हुए थे | आपके पिता का नाम मोहम्मद हुसैन सिद्दीकी था जो कि स्वयं एक उर्दू कवि, कई पुस्तकों के ल…

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