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शराफत हम से कहती है, शराफत से जिया जाए - अशोक मिजाज़
शराफत हम से कहती है, शराफत से जिया जाए - अशोक मिजाज़

शराफत हम से कहती है, शराफत से जिया जाए, कोई हद भी तो होती है, कहाँ तक चुप रहा जाए। ग़ज़ल से गुफ़्तगू हमने इशारों में बहुत कर ली, मगर अब दि...

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 कविता की नदिया - महावीर उत्तरांचली
कविता की नदिया - महावीर उत्तरांचली

शब्द कहें तू न रुक भइया कदम बढ़ाकर चल-चल-चल-चल कविता की नदिया बहती है करती जाए कल-कल-कल-कल कविता की नदिया बहती है………. काग़ज़ पर होती है खे...

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रोज़ा रखो या न रखो माहे- रमज़ान में - डा: संजय दानी "कंसल"
रोज़ा रखो या न रखो माहे- रमज़ान में - डा: संजय दानी "कंसल"

रोज़ा रखो या न रखो माहे- रमज़ान में, दिल की बुराई तो तजो माहे -रमज़ान में। ख़ुशियां ख़ूब मना ली जीवन में गर तो, ग़ैरों के दुख को हरो माहे-...

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ब्रज नारायण चकबस्त एक बेजोड शायर ( शायर परिचय )
ब्रज नारायण चकबस्त एक बेजोड शायर ( शायर परिचय )

अंगेजी में कहावत है की " जिन्हें भगवान ज्यादा प्यार करता है वे नौजवानी में मर जाते है | " यह मिसाल और किसी पर लागु हो या न ह...

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दादी नानी की ये कहानी ( बाल कविता ) -  जिया उर रहमान ज़ाफरी
दादी नानी की ये कहानी ( बाल कविता ) - जिया उर रहमान ज़ाफरी

दादी नानी की ये कहानी छोड़ो मम्मी हुई पुरानी बोलो चाँद चमकता क्यों है जुगनू आख़िर जलता क्यों है तारे कैसे टिक पाते हैं क्यो...

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मेरा वजूद भी क्या है तुम्हे बताऊंगा- अज़ीज़ आज़ाद
मेरा वजूद भी क्या है तुम्हे बताऊंगा- अज़ीज़ आज़ाद

मेरा वजूद भी क्या है तुम्हे बताऊंगा जिस्म की कैद से जिस दिन भी निकल जाऊंगा मुझे नज़र की हदों में समेटने वालो ये कितनी तंग हदे है तुम्...

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जिस सदी में रखना हो उस सदी में रख देना - शिव शरण बंधु
जिस सदी में रखना हो उस सदी में रख देना - शिव शरण बंधु

जिस सदी में रखना हो उस सदी में रख देना मेरे सब गुनाहों को रोशनी में रख देना इश्क़ के उजालों की जब कभी ज़रूरत हो हम बुझे चराग़ों को तीरगी ...

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सामने कारनामे जो आने लगे - अर्पित शर्मा "अर्पित"
सामने कारनामे जो आने लगे - अर्पित शर्मा "अर्पित"

सामने कारनामे जो आने लगे, आईना लोग मुझको दिखाने लगे | जो समय पर ये बच्चे ना आने लगे, अपने माँ बाप का दिल दुखाने लगे | फ़ैसला लौट जाने ...

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बेसबब रूठ के जाने के लिए आए थे - मुजफ्फर हनफ़ी
बेसबब रूठ के जाने के लिए आए थे - मुजफ्फर हनफ़ी

बेसबब रूठ के जाने के लिए आए थे आप तो हमको मनाने के लिए आए थे ये जो कुछ लोग खमीदा हैं कमानोँ की तरह आसमानोँ को झुकाने के लिए आए थे हम क...

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नया विवाह - मुंशी प्रेमचंद
नया विवाह - मुंशी प्रेमचंद

हमारी देह पुरानी है, लेकिन इसमें सदैव नया रक्त दौड़ता रहता है। नये रक्त के प्रवाह पर ही हमारे जीवन का आधार है। पृथ्वी की इस चिरन्तन व्...

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घर की क़िस्मत जगी घर में आए सजन  - नजीर बनारसी
घर की क़िस्मत जगी घर में आए सजन - नजीर बनारसी

घर की किस्मत जगी घर में आए सजन ऐसे महके बदन जैसे चंदन का बन आज धरती पे है स्वर्ग का बाँकपन अप्सराएँ न क्यूँ गाएँ मंगलाचरण ज़िंदगी स...

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जहन में वो तो ख्वाब जैसा है - अर्पित शर्मा "अर्पित"
जहन में वो तो ख्वाब जैसा है - अर्पित शर्मा "अर्पित"

जहन में वो तो ख्वाब जैसा है, वो बदन भी गुलाब जैसा है | बंद आँखों से पढ़ भी सकता हूँ, तेरा चेहरा किताब जैसा है | मेरी पलके झुकी है सजदे...

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