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ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा
मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा

यहाँ तक आते आते सूख जाती है कई नदियाँ
मुझे मालूम है पानी कहाँ ठहरा हुआ होगा

ग़ज़ब ये है की अपनी मौत की आहट नहीं सुनते
वो सब के सब परेशाँ हैं वहाँ पर क्या हुआ होगा

तुम्हारे शहर में ये शोर सुन सुन कर तो लगता है
कि इंसानों के जंगल में कोई हाँका हुआ होगा

कई फ़ाक़े बिता कर मर गया जो उस के बारे में
वो सब कहते हैं अब ऐसा नहीं ऐसा हुआ होगा

यहाँ तो सिर्फ़ गूँगे और बहरे लोग बस्ते हैं
ख़ुदा जाने यहाँ पर किस तरह जलसा हुआ होगा

चलो अब यादगारों की अँधेरी कोठरी खोलें
कम-अज़-कम एक वो चेहरा तो पहचाना हुआ होगा- दुष्यंत कुमार

Roman

ye sara jism jhuk kar bojh se dohra hua hoga
mai sajde me nahi tha aap ko dhokha hua hoga

yaha tak aate aate sukh jati hai kai nadiya
mujhe maloom hai paani kahan thahara hua hoga

gazab ye hai ki apni mout ki aahat nahi sunte
wo sab ke sab pareshan hai waha par kya hua hoga

tumhare shahar me ye shor sun kar to lagta hai
ki insano ke jungal me koi hanka hua hoga

kai faake bita kar mar gaya jo us ke baare me
wo sab kahe hai ab aisa nahi aisa hua hoga

yaha to sirf gunge aur bahre log baste hai
khuda jane yahn par kis tarah jalsa hua hoga

chalo ab yadgaro ki andheri kothri khole
kam-az-kam ek wo chehra to pahchana hua hoga - Dushyant Kumar
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  1. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 08/10/2018 की बुलेटिन, अकेलापन दूर करने का उपाय “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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