0
विनय मिश्र की किताब तेरा होना तलाशू
विनय मिश्र की किताब तेरा होना तलाशू

इन दिनों हिन्दी कविता में सबसे अधिक चर्चा हिन्दी ग़ज़ल की है | आज हिन्दी ग़ज़ल को जिन लोगों ने इस मुकाम पर लाया है उसमें एक महत्वपूर्ण नाम...

Read more »

0
करवा चौथ  - रमेश देव सिंहमार
करवा चौथ - रमेश देव सिंहमार

उनके हाथो से चरणामृत पी, सदियों तक अपना बनाना चाहती हूँ | भाव-सागर में भटक ना जाऊं कही, अपने जीवन का मांझी बनाना चाहती हूँ ऐ करवा माँ ...

Read more »

0
उनके चेहरे से जो मुस्कान चली जाती है -  मिलन 'साहिब'
उनके चेहरे से जो मुस्कान चली जाती है - मिलन 'साहिब'

उनके चेहरे से जो मुस्कान चली जाती है, मेरी दौलत मेरी पहचान चली जाती है। जिंदगी रोज गुजरती है यहाँ बे मक़सद, कितने लम्हों से वो अंजान चली...

Read more »

0
उसको हैरत में डालना है मुझे -  अर्पित शर्मा "अर्पित"
उसको हैरत में डालना है मुझे - अर्पित शर्मा "अर्पित"

उसको हैरत में डालना है मुझे, और दिल से निकालना है मुझे | एहतियातो से उसको छूना है, अपना दिल भी संभालना है मुझे | तेरे और मेरे नाम का ...

Read more »

0
ना दिवाली होती, और ना पठाखे बजते - हरिवंशराय बच्चन
ना दिवाली होती, और ना पठाखे बजते - हरिवंशराय बच्चन

अमृतसर में रावण पुतला दहन के दौरान हुए रेल दुर्घटना में सैकड़ों लोगों के मारे जाने पर हरिवंशराय बच्चन की लिखी यह कविता आज के दौर में प्रासंग...

Read more »

0
दोस्तो बारगह-ए-क़त्ल सजाते जाओ - मोहसिन भोपाली
दोस्तो बारगह-ए-क़त्ल सजाते जाओ - मोहसिन भोपाली

दोस्तो बारगह-ए-क़त्ल सजाते जाओ क़र्ज़ है रिश्ता-ए-जाँ, क़र्ज़ चुकाते जाओ रहे ख़ामोश तो ये होंठ सुलग उठेंगे शोला-ए-फ़िक़्र को आवाज़ बन...

Read more »

0
माँ सब ठीक कर देगी - डा जियाउर रहमान जाफ़री
माँ सब ठीक कर देगी - डा जियाउर रहमान जाफ़री

उठते ही घर ठीक करेगी माँ फिर बिस्तर ठीक करेगी चावल हमें खिला देने को कंकड़ पत्थर ठीक करेगी गिन के सिक्के चार दफ़ा में फिर ख़ुद छप्पर ...

Read more »

0
ख़ुद अपने साथ सफ़र में रहे तो अच्छा है - अमीर क़ज़लबाश
ख़ुद अपने साथ सफ़र में रहे तो अच्छा है - अमीर क़ज़लबाश

ख़ुद अपने साथ सफ़र में रहे तो अच्छा है, वो बे-ख़बर है ख़बर में रहे तो अच्छा है ।। क़दम क़दम यूँही रखना दिलों में अंदेशा, चराग़ राहगुज़र...

Read more »

1
ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा - दुष्यंत कुमार
ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा - दुष्यंत कुमार

ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा यहाँ तक आते आते सूख जाती है कई नदियाँ मुझे मालूम है...

Read more »

0
दोस्तो नजरे फसादात नही होने की - मुजफ्फर हनफ़ी
दोस्तो नजरे फसादात नही होने की - मुजफ्फर हनफ़ी

दोस्तो नजरे फसादात नही होने की जान दे कर भी मुझे मात नहीं होने की उन से बिछडे तो लगा ज...

Read more »
 
 
Top