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Kamchor - Ismat Chugtai कामचोर - इस्मत  चुगताई
Kamchor - Ismat Chugtai कामचोर - इस्मत चुगताई

बड़ी देर के वाद - विवाद के बाद यह तय हुआ कि सचमुच नौकरों को निकाल दिया जाए. आखिर, ये मोटे-मोटे किस काम के हैं! हिलकर पानी नहीं पीते. इन्हें ...

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कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है - कैफी आज़मी
कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है - कैफी आज़मी

कोई तो सूद चुकाए, कोई तो ज़िम्मा ले उस इंकलाब का, जो आज तक उधार सा है कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है जहाँ को अपनी तबाही का इंत...

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ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप - कैफी आज़मी
ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप - कैफी आज़मी

ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उसकी धूप क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बाद वो भी सराहने लगे अर्बाब-ए-फ़न के बाद दाद-ए-सुख़न मि...

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बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर - नज़ीर बनारसी
बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर - नज़ीर बनारसी

बुझा है दिल भरी महफ़िल में रौशनी देकर, मरूँगा भी तो हज़ारों को ज़िन्दगी देकर क़दम-क़दम पे रहे अपनी आबरू का ख़याल, गई तो हाथ न आएगी जान...

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