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कह दो मंदिर में चले आएँ पुजारी सारे  - कृष्ण बिहारी नूर
कह दो मंदिर में चले आएँ पुजारी सारे - कृष्ण बिहारी नूर

आज श्री कृष्ण बिहारी 'नूर' साहब की 14 वीं पुण्य तिथि है, उनकी स्मृतियाँ और आशीर्वाद हम सभी के साथ हैं,उनके साथ गुज़रे हुए पल अक्सर स...

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तुम नद्दी पर जा कर देखो चाँद - अफ़सर मेरठी
तुम नद्दी पर जा कर देखो चाँद - अफ़सर मेरठी

तुम नद्दी पर जा कर देखो जब नद्दी में नहाए चाँद कैसी लगाई डुबकी उस ने डर है डूब न जाए चाँद किरनों की इक सीढ़ी ले कर छम छम उतरा जाए ...

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मेरी बीवी क़ब्र में लेटी है - सय्यद ज़मीर जाफ़री
मेरी बीवी क़ब्र में लेटी है - सय्यद ज़मीर जाफ़री

पकिस्तान के मशहूर शायर ज़मीर जाफरी साहब आज ही के इस दुनिया को अलविदा कह गए थे आज उनकी एक मशहूर ग़ज़ल पेश है :- मेरी बीवी क़ब्र में लेटी है ...

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माँ के रहने पर ही पत्थर पर असर होता है - आतिश इंदौरी
माँ के रहने पर ही पत्थर पर असर होता है - आतिश इंदौरी

माँ के रहने पर ही पत्थर पर असर होता है झोपडी हो या क़िला तब कही घर होता है तर बतर कोई दुआओं से अगर होता है हर किसी के लिए वो शख्स शज़र हो...

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Maa Short Stoy माँ - महावीर उत्तरांचली
Maa Short Stoy माँ - महावीर उत्तरांचली

"सूरा-40 अल-मोमिन," पवित्र कुरआन को माथे से लगाते हुए उस्ताद अख़लाक़ ने कहा, "शुरू नामे-अल्लाह से। जो बड़ा ही मेहरबान और नि...

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अम्मा - आलोक श्रीवास्तव
अम्मा - आलोक श्रीवास्तव

चिंतन दर्शन जीवन सर्जन, रूह नज़र पर छाई अम्मा सारे घर का शोर शराबा, सूनापन तनहाई अम्मा उसने खुद़ को खोकर मुझमें, एक नया आकार लिया है...

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Anokha Romance अनोखा रोमांस - अन्तोन चेखव
Anokha Romance अनोखा रोमांस - अन्तोन चेखव

संगीतकार स्मिसकोव नगर से राजकुमार बिबुलोव के महल को जा रहा था, जहाँ एक सगाई के उपलक्ष्य में शाम को संगीत और नृत्य का कार्यक्रम रखा गया था। च...

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majdoor ka ek din मजदूर का एक दिन  - अनुराग शर्मा
majdoor ka ek din मजदूर का एक दिन - अनुराग शर्मा

बाईं आँख रह-रह कर फड़क रही थी। कई बार मला मगर कोई फायदा न हुआ। उसे याद आया कि माँ बाईं आँख फड़कने को कितना बुरा मानती थी। छोटा था तो वह भी...

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Majdoor Story मजदूर (कहानी) - देवेश वशिष्ठ खबरी
Majdoor Story मजदूर (कहानी) - देवेश वशिष्ठ खबरी

उसने उस पूरे दिन हाड़-तोड़ मेहनत की थी| मालिक ने खुश होकर उसे आज रोज से 10 रुपये ज्यादा मजदूरी दी थी। शाम के झिटपुटे में उसने रिफाइनरी को दे...

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मज़दूर की अज़मत  - मुज़फ्फर हनफ़ी
मज़दूर की अज़मत - मुज़फ्फर हनफ़ी

तेल निकालें रेत से ये ग़ल्ला बंजर खेत से ये ये तो हरफन मौला हैं आठूं गाँठ कमीत से ये बेशक दुनिया क़ायम हे मज़दूरों की मेहनत पर ...

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