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मक़तल छोड़ के घर जाएं नामुमकिन है - राज़िक़ अंसारी
मक़तल छोड़ के घर जाएं नामुमकिन है - राज़िक़ अंसारी

राज़िक़ अंसारी साहब इंदौर के रहने वाले है आपने अपनी शायरी की शुरुवात सन 1985 में की थी आपका जन्म 1 अप्रैल 1960 को हुआ | मक़तल छोड़ के घर जा...

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बस यही तुझसे यार होना था - मोमिन खां मोमिन
बस यही तुझसे यार होना था - मोमिन खां मोमिन

गुस्सा बेगाना-वार होना था बस यही तुझसे यार होना था क्यों न होते अज़ीज़ गैर तुम्हे मेरी किस्मत में ख़्वार होना था मुझे जन्नत में वह सनम न ...

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laash लाश  कमलेश्वर
laash लाश कमलेश्वर

सारा शहर सजा हुआ था। खास-खास सड़कों पर जगह-जगह फाटक बनाए गए थे। बिजली के खम्बों पर झंडे, दीवारों पर पोस्टर। वालंटियर कई दिनों से शहर में परच...

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अभी चुप रहो तुम, आवाम सो रहा है  - गुरप्रीत काफिऱ
अभी चुप रहो तुम, आवाम सो रहा है - गुरप्रीत काफिऱ

इंसानियत का कत्ल सरेआम हो रहा है, अभी चुप रहो तुम, आवाम सो रहा है । हो धरम या सियासत बस एक ही कहानी हाथों में छुरी ले के राम राम हो रहा ...

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आप से तुम, तुम से तू होने लगी- दाग देहलवी
आप से तुम, तुम से तू होने लगी- दाग देहलवी

रंज की जब गुफ्तगू होने लगी आप से तुम, तुम से तू होने लगी मेरी रुसवाई की नौबत आ गयी शोहरत उनकी कूबकू होने लगी अब के मिल के देखिये क्या ...

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paagalpan पागलपन - माधवी कुटटी
paagalpan पागलपन - माधवी कुटटी

कई लोगों से सुनने के बाद ही मैं यकीन कर सकी कि अरुणा पागल हो गयी है। दिल्ली से आने के दूसरे ही दिन मैं उसके घर गयी। अरुणा की सुन्‍दर नेपाली ...

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उसका अंदाज है अभी तक लड़कपन वाला- कैफ भोपाली
उसका अंदाज है अभी तक लड़कपन वाला- कैफ भोपाली

आज ही के दिन 24 जुलाई 1991 को ठीक 24 साल पहले शायर कैफ भोपाली साहब इस दुनिया को अलविदा कह गए और अपनी यादो उनके मुरीदो के लिए छोड़ गए उनकी एक...

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bhagat singh ka bhoot भगत सिंह का भूत हनुमंत शर्मा
bhagat singh ka bhoot भगत सिंह का भूत हनुमंत शर्मा

बिस्तर से उतरने के पहले ही आज का शेड्यूल उन्हें रटा गया था | आज १० बजे भगत सिंह की मूर्ती का माल्यार्पण करना है |१२ बजे युवा कार्यशाला का उद...

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darwaje ke paar दरवाजे के पार मां मुंशी प्रेमचंद
darwaje ke paar दरवाजे के पार मां मुंशी प्रेमचंद

सूरज क्षितिज की गोद से निकला, बच्चा पालने से-वही स्निग्धता, वही लाली, वही खुमार, वही रोशनी। मैं बरामदे में बैठा था। बच्चे ने दरवाजे से झांका...

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गरीबे शहर का सर है - अहमद कमाल 'परवाजी'
गरीबे शहर का सर है - अहमद कमाल 'परवाजी'

गरीबे शहर का सर है के शहरयार का है ये हमसे पूछ के गम कौन सी कतार का है किसी की जान का, न मसला शिकार का है यहाँ मुकाबला पैदल से शहसवार क...

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mushkil kaam मुश्किल काम - असगर वज़ाहत
mushkil kaam मुश्किल काम - असगर वज़ाहत

जब दंगे खत्म हो गये, चुनाव हो गये, जिन्हें जीतना था जीत गये, जिनकी सरकार बननी थी बन गयी, जिनके घर और जिनके जख्म भरने थे भर गये, तब दंगा करने...

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बुजुर्गो कि बाते बेमानी नहीं है - रौनक रशीद खान
बुजुर्गो कि बाते बेमानी नहीं है - रौनक रशीद खान

बुजुर्गो कि बाते बेमानी नहीं है समझना उन्हें बस आसानी नहीं है मोहब्बत में बेताबियो का है आलम कभी रातभर नींद आनी नहीं है मेरे हौसलों क...

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करोगे याद तो - बशर नवाज
करोगे याद तो - बशर नवाज

उर्दू शायरी के बडे शायरो में शुमार किये जाने वाले शायर बशर नवाज साहब का 9 जुलाई 2015 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में निधन हो गया । आपका यह गी...

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एक जुग बाद शबे-गम की सहर देखी है - गोपाल दास नीरज
एक जुग बाद शबे-गम की सहर देखी है - गोपाल दास नीरज

एक जुग बाद शबे-गम की सहर देखी है देखने की न उम्मीद थी मगर देखी है जिसमे मजहब के हर एक रोग का लिखा है इलाज वो किताब हमने किसी रिंद के घर ...

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मेरा वो आशना था बहुत - चाँद शेरी
मेरा वो आशना था बहुत - चाँद शेरी

चाँद शेरी साहब के जन्मदिन के अवसर पर उनकी यह ग़ज़ल पेश है :- मेरा वो आशना था बहुत मुझसे लेकिन खफ़ा था बहुत ज़र्द पत्ते हरे हो गए बादलों मे...

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