1
गुलिस्ता की हद तोड़ पाए तो जानू - पूनम कौसर
गुलिस्ता की हद तोड़ पाए तो जानू - पूनम कौसर

गुलिस्ता की हद तोड़ पाए तो जानू महक मेरे घर तक भी आए तो जानू सुबह वक्त सूरज को सब पूजते है कोई शाम को सर झुकाए तो जानू तू माहिर है ! हस...

Read more »

3
barsate hue sawan me बरसते हुए सावन में बदनाम शायर वरुण मित्तल
barsate hue sawan me बरसते हुए सावन में बदनाम शायर वरुण मित्तल

बरसते हुए सावन में आज वो पुराने दरख्त टूट गए वो जिनकी तन्हाइयो की छाया में कई राहगीरों की रहगुजर थी वो जिनके बिखरे साये में किसी के बचपन की ...

Read more »

0
तुमने तो कह दिया - नोशी गिलानी
तुमने तो कह दिया - नोशी गिलानी

Noshi Gilani तुमने तो कह दिया कि मोहब्बत नहीं मिली मुझको तो ये भी कहने की मोहलत नहीं मिली नींदों के देस जाते, कोई ख्वाब देखते लेकिन द...

Read more »

1
sherlock holmes story मौत का बीज शेरलॉक होम्स कहानी
sherlock holmes story मौत का बीज शेरलॉक होम्स कहानी

शेरलॉक होम्स के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे कुछ ने उनकी कहानिया पढ़ी होगी तो कुछ ने उन पर बनी फिल्म को देखा होगा | इस जासूसी किरदार क...

Read more »

1
खैर, मै जीत तो नहीं पाया- विकास शर्मा राज़
खैर, मै जीत तो नहीं पाया- विकास शर्मा राज़

खैर, मै जीत तो नहीं पाया हाथ उसके भी कुछ नहीं आया चोर था मन में इसलिए मुझको हर कोई आइना नज़र आया ये मुलाकात भी जरुरी थी सर्द रिश्तों क...

Read more »

0
अबके बरसात में गर झूम के आये बादल -शैदा बघौनवी
अबके बरसात में गर झूम के आये बादल -शैदा बघौनवी

अबके बरसात में गर झूम के आये बादल प्यास कुछ पिछले जनम की भी बुझाये बादल यादे-माज़ी न मुझे आके दिलाए बादल अब मुझे खून के आसू न रुलाये बादल...

Read more »

0
सय्यादो से आजाद फज़ा मांग रहे हो-चाँद शेरी
सय्यादो से आजाद फज़ा मांग रहे हो-चाँद शेरी

चाँद शेरी साहब के जन्मदिवस पर उन्हें शुभकामनाए और उनकी यह ग़ज़ल : Chand Sheri सय्यादो से आजाद फज़ा मांग रहे हो गुलचीनो से गुलशन का भला म...

Read more »

1
फना के गार से ख्वाहिशो के लंबे हाथ बाहर थे - मुजफ्फर हनफ़ी
फना के गार से ख्वाहिशो के लंबे हाथ बाहर थे - मुजफ्फर हनफ़ी

फना के गार से ख्वाहिशो के लंबे हाथ बाहर थे वो दलदल में सर तक धस चुके थे हाथ बाहर थे हमारी जिंदगी भर पाँव चादर से रहे बाहर ताज्जुब है सिक...

Read more »

0
fark फर्क विष्णु प्रभाकर
fark फर्क विष्णु प्रभाकर

फर्क   एक लघुकथा - विष्णु प्रभाकर उस दिन उसके मन में इच्छा हुई कि भारत और पाक के बीच की सीमारेखा को देखा जाए, जो कभी एक देश था, वह अब दो हो...

Read more »

0
सरकती जाये है रुख़ से नक़ाब- अमीर मीनाई
सरकती जाये है रुख़ से नक़ाब- अमीर मीनाई

Ameer Minai सरकती जाये है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता-आहिस्ता निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता-आहिस्ता जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर...

Read more »
 
 
Top