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चिंतन दर्शन जीवन सर्जन, रूह नज़र पर छाई अम्मा
सारे घर का शोर शराबा, सूनापन तनहाई अम्मा

उसने खुद़ को खोकर मुझमें, एक नया आकार लिया है,
धरती अंबर आग हवा जल, जैसी ही सच्चाई अम्मा

सारे रिश्ते- जेठ दुपहरी, गर्म हवा आतिश अंगारे
झरना दरिया झील समंदर, भीनी-सी पुरवाई अम्मा

घर में झीने रिश्ते मैंने, लाखों बार उधड़ते देखे
चुपके चुपके कर देती थी, जाने कब तुरपाई अम्मा

बाबू जी गुज़रे, आपस में-सब चीज़ें तक़सीम हुई तब-
मैं घर में सबसे छोटा था, मेरे हिस्से आई अम्मा - आलोक श्रीवास्तव

Roman

chintan darshan jeevan sarjan, rooh najar par chhai amma
sare ghar ka shor sharaba, sunapan tanhai amma

usne khud ko khokar mujhme, ek naya aakar liya hai
dharti ambar aag hawa jal, jaisi hi sachchai amma

sare rishte-jeth duphari, garm hawa aatish angare
jharna dariya jheel samnadar, bhini-si purwai amma

ghar me jhine rishte maine, lakho baar udhadate dekhe
chupke chupke kar deti thi, jane kab turpai amma

babu ji gujre, aapas me sab cheeze takseem hui tab
mai ghar me sabse chhota tha, mere hisse aai amma - Alok Shrivastav

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  1. मदर्स डे की हार्दिक शुभकामनाओं सहित , " तेरे आँचल में - मदर्स डे की ख़ास ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. आपका बहुत बहुत धन्यवाद आप बिलकुल दूर दूर से मोती चुनकर लाये है

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  2. वाह !!!
    लाजवाब
    मातृदिवस की शुभकामनाएं

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