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साजिद हाश्मी
आपका जन्म 7 जनवरी 1955 को राजगढ़, ब्यावरा, म.प्र. में मुहम्मद हयात हाश्मी के यहाँ हुआ | आप वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन के राजस्व विभाग में कार्यरत है |
आपसे इस मोबाइल न. पर संपर्क किया जा सकता है : 9425660027

आज के दौर में ऐसा भी तो होता है बहुत
जो भी हँसता है वही टूट के रोता है बहुत

तंजिया बर्क के अहसास को धमकाया है,
सर पे जुल्मात का बादल भी तो गरजा है बहुत

फूंक उल्फत का नगर लोग चले है लेकिन
भाईचारा पसे अंगार भी तडपा है बहुत

आप ही अम्न के जामिन है सुकूं के पैकर
महफिले ज़ुल्म में पर आपकी चर्चा है बहुत

बूंद  बा बूंद पिया सारा समुन्दर लेकिन
लब पे खुश्की है बहुत आदमी तश्ना है बहुत

रूठ के मुझसे चला आया है मेरा सब कुछ
मैंने उस शोख को जाते हुए देखा है बहुत

सर पे रहने दो मुहब्बत के शज़र का साया
वक्त की धुप में इस पेड़ का साया है बहुत

ऐसा लिखो के ज़माने को बदल दो "साजिद"
ये जरुरी है बहुत वक्त की मंशा है बहुत - साजिद हाश्मी

Roman

aaj ke dour me aisa bhi hota hai bahut
jo bhi hasta hai wahi tut ke rota hai bahut

tanziya barq ke ahsas ko dhamkaya hai
sar p zulmat ka badal bhi to garja hai bahut

funk ulfat ka nagar log chale hai lekin
bhaichara pase angaar bhi tadpa hai bahut

aap hai amn ke zamin hai sunkun ke paikar
mahfile zulm me par aapki charcha hai bahut

bund ba bund piya sara samundar lekin
lab pe khushki hai bahut aadmi tashna hai bahut

ruth ke chala aaya hai mera sab kuch
maine us shoukh ko jate hue dekha hai bahut

sar pe rahne do muhbbat ke shazar ka saya
waqt ki dhoop me is ped ka saya hai bahut

aisa likho ke zamane ko badal do "Sajid"
ye jaruri hai bahut waqt ki mansha hai bahut - Sajid Hashmi

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