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इन्हीं के हाथों सड़क पे हम तुम पड़े हुए हैं - इरतज़ा निशात
इन्हीं के हाथों सड़क पे हम तुम पड़े हुए हैं - इरतज़ा निशात

इन्हीं के हाथों सड़क पे हम तुम पड़े हुए हैं इन्हें बदल दो, ये रहनुमा सब सड़े हुए हैं हम और दुश्मन वतन के? फिरकापरस्त गुंडो! ये सारे क़िस्से...

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आज के दौर में ऐसा भी तो होता है बहुत - साजिद हाश्मी
आज के दौर में ऐसा भी तो होता है बहुत - साजिद हाश्मी

साजिद हाश्मी आपका जन्म 7 जनवरी 1955 को राजगढ़, ब्यावरा, म.प्र. में मुहम्मद हयात हाश्मी के यहाँ हुआ | आप वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन के रा...

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जब से गई है माँ मेरी रोया नहीं - कवि कुलवंत सिंह
जब से गई है माँ मेरी रोया नहीं - कवि कुलवंत सिंह

जब से गई है माँ मेरी, रोया नहीं बोझिल हैं पलकें फिर भी मैं सोया नहीं ऐसा नहीं आँखे मेरी नम हुई न हों, आँचल नहीं था पास फिर रोया नहीं ...

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साफ़ ज़ाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं - अख्तर अंसारी
साफ़ ज़ाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं - अख्तर अंसारी

साफ़ ज़ाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं मुँह से कहते हुए ये बात मगर डरते हैं एक तस्वीर-ए-मुहब्बत है जवानी गोया जिस में रंगो की एवज़ ख़...

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बोले बग़ैर हिज्र का क़िस्सा सुना गया  - वीरेन्द्र खरे 'अकेला'
बोले बग़ैर हिज्र का क़िस्सा सुना गया - वीरेन्द्र खरे 'अकेला'

बोले बग़ैर हिज्र का क़िस्सा सुना गया सब दिल का हाल आपका चेहरा सुना गया इस दौर में किसी को किसी का नहीं लिहाज़ बातें हज़ार अपना ही बेटा ...

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