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जब कुछ नहीं बना तो हमने इतना कर दिया..
खाली हथेली पर दुआ का सिक्का धर दिया।

कब तक निभाते दुश्मनी हम वक्त से हर दिन
इस बार जब मिला वो तो बाँहों में भर लिया।

उस गाँव के बाशिंदों में अजीब रस्म है,
बच्ची के जन्म लेते ही गाते हैं मर्सिया।

बदली हुकूमतें मगर न किस्मतें बदलीं,
मुश्किलजदा लोगों को सबने दर बदर किया।

मुद्दा कोई हो, उसपे बोलना तो बहुत दूर,
संजीदा हो के सोचना भी बंद कर दिया। - रमेश तैलंग
रमेश तेलंग 02 जून 1946 को टीकमगढ़, मध्यप्रदेश में जन्मे | आप बाल साहित्य के अतिरिक्त ग़ज़ल भी लिखते है | आप के ब्लॉग को यहाँ विजिट किया जा सकता है http://rameshtailang.blogspot.in/

Roman

jab kuch nahi bana to hamne itna kar diya
khali hatheli par dua ka sikka dhar diya

kab tak nibhate dushmani ham waqt se har din
is bar jab mila wo to baho me bhar liya

us gaon ke bashindo me ajeeb rasm hai
bachchi ke janm lete hi gaate hai marsiya

badli hukumate magar n kismate badli
mushkiljada logo ko sabne dar badar kiya

mudda koi ho uspe bolna to door
sanjeeda ho ke sochna bhi band kar diya - Ramesh Tailang

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