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अदावत दिल में रखते हैं मगर यारी दिखाते हैं
न जाने लोग भी क्या क्या अदाकारी दिखाते हैं

यक़ीनन उनका जी भरने लगा है मेज़बानी से
वो कुछ दिन से हमें जाती हुई लारी दिखाते हैं

उलझना है हमें बंजर ज़मीनों की हक़ीक़त से
उन्हें क्या, वो तो बस काग़ज़ पे फुलवारी दिखाते हैं

मदद करने से पहले तुम हक़ीक़त भी परख लेना
यहाँ पर आदतन कुछ लोग लाचारी दिखाते हैं

डराना चाहते हैं वो हमें भी धमकियाँ देकर
बड़े नादान हैं पानी को चिन्गारी दिखाते हैं

दरख़्तों की हिफ़ाज़त करने वालो डर नहीं जाना
दिखाने दो, अगर कुछ सरफिरे आरी दिखाते हैं

हिमाक़त क़ाबिले-तारीफ़ है उनकी ‘अकेला’जी
हमीं से काम है हमको ही रंगदारी दिखाते हैं - विरेन्द्र खरे अकेला

Roman


adawat dil me rakhte hai magar yaari dikhate hai
n jane log bhi kya kya adakari dikhate hai

yakinan unka ji bharne laga hai mezbani se
wo kuch din se hame jati hui lari dikhate hai

uljhana hai hame banzar zameeno ki haqiqat se
unhe kya, wo to bas kaagaz p fulwari dikhate hai

madad karne se pahle tum haqiqat bhi parakh lena
yaha par aadtan kuch log lachari dikhate hai

darana chahte hai wo hame bhi dhamkiya dekar
bade nadan hai pani ko chingari dikhate hai

darkhto ki hifazat karne walo dar nahi jana
dikhane do, agar kuch sarfire aari dikhate hai

himakat qabile-tarif hai unki 'Akela' ji
hami se kaam hai hamko hi rangdari dikhate hai - Virendra Khare Akela

परिचय

विरेन्द्र खरे का जन्म 18 अगस्त 1968 को छतरपुर (म.प्र.) के किशनगढ़ ग्राम में हुआ आपके पिता स्व० श्री पुरूषोत्तम दास खरे एवं माता श्रीमती कमला देवी खरे है | आपने अपनी शिक्षा एम०ए० (इतिहास), बी०एड० में पूरी की | आप प्रमुख रूप से ग़ज़ल, गीत, कविता, व्यंग्य-लेख, कहानी, समीक्षा आलेख विधाओ में लिखते है | आप अपनी रचनाओ में उपनाम "अकेला" उपयोग करते है |
Virendra Khare Akela

आपकी तीन किताबे प्रकाशित हो चुकी है जिनमे
1. शेष बची चौथाई रात 1999 (ग़ज़ल संग्रह),
2. सुबह की दस्तक 2006 (ग़ज़ल-गीत-कविता),
3. अंगारों पर शबनम 2012(ग़ज़ल संग्रह) शामिल है |

आपकी कई रचनाये वागर्थ, कथादेश, वसुधा, शुक्रवार सहित विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है एवं लगभग 22 वर्षों से आकाशवाणी छतरपुर से रचनाओं का निरंतर प्रसारण होता आ रहा है | आपकी कई रचनाये आकाशवाणी द्वारा गायन हेतु भी ली गयी है |

आपके ग़ज़ल-संग्रह 'शेष बची चौथाई रात' पर अभियान जबलपुर द्वारा 'हिन्दी भूषण' अलंकरण दिया गया | इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन एवं बुंदेलखंड हिंदी साहित्य-संस्कृति मंच सागर [म.प्र.] द्वारा कपूर चंद वैसाखिया 'तहलका', अ०भा० साहित्य संगम, उदयपुर द्वारा काव्य कृति ‘सुबह की दस्तक’ पर राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान के अन्तर्गत 'काव्य-कौस्तुभ' सम्मान तथा लायन्स क्लब द्वारा ‘छतरपुर गौरव’ सम्मान मिला |

वर्तमान में आप अध्यापन कार्य कर रहे है | आपसे निम्न पते व नंबर पर संपर्क किया जा सकता है :

सम्पर्क : छत्रसाल नगर के पीछे, पन्ना रोड, छतरपुर (म.प्र.)पिन-471001
मोबाइल फ़ोन नम्बर-09981585601
Email-virendraakelachh@gmail.com

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