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मैं जो रास्ते पे चल पड़ी - मीना कुमारी नाज़
मैं जो रास्ते पे चल पड़ी - मीना कुमारी नाज़

आज यानि ३१ मार्च को मीना कुमारी जी की पुण्यतिथि है | आपको अपनी फ़िल्मी अदाकारी के लिए जाना जाता है पर अपने जीवन में देखे गए दर्दो ने आपको एक...

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अदावत दिल में रखते हैं मगर यारी दिखाते हैं - विरेन्द्र खरे अकेला
अदावत दिल में रखते हैं मगर यारी दिखाते हैं - विरेन्द्र खरे अकेला

अदावत दिल में रखते हैं मगर यारी दिखाते हैं न जाने लोग भी क्या क्या अदाकारी दिखाते हैं यक़ीनन उनका जी भरने लगा है मेज़बानी से वो कुछ दिन...

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आओ मिलकर गले इस नये साल में - अभिषेक कुमार अम्बर
आओ मिलकर गले इस नये साल में - अभिषेक कुमार अम्बर

आप सभी को गुडी पड़वा की हार्दिक शुभकामनाए आओ मिलकर गले इस नये साल में भूल जायें गिले इस नये साल में। घर न कोई जले इस नये साल में ...

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जब कुछ नहीं बना तो हमने इतना कर दिया - रमेश तैलंग
जब कुछ नहीं बना तो हमने इतना कर दिया - रमेश तैलंग

जब कुछ नहीं बना तो हमने इतना कर दिया.. खाली हथेली पर दुआ का सिक्का धर दिया। कब तक निभाते दुश्मनी हम वक्त से हर दिन इस बार जब मिला वो ...

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आया तेरा ख़याल कि आये हसीन ख़्वाब - विरेन्द्र खरे अकेला
आया तेरा ख़याल कि आये हसीन ख़्वाब - विरेन्द्र खरे अकेला

आया तेरा ख़याल कि आये हसीन ख़्वाब दिल में न जाने कितने समाये हसीन ख़्वाब उस हादसे में यार सभी कुछ तो लुट गया मुश्किल से जैसे तैसे बचाये...

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कर चुके हम फ़ैसला अब कुछ भी हो- राज़िक़ अंसारी
कर चुके हम फ़ैसला अब कुछ भी हो- राज़िक़ अंसारी

कर चुके हम फ़ैसला अब कुछ भी हो इश्क़ में इस दिल का यारब कुछ भी हो चारा साज़ों को नहीं कोई ग़रज़ दर्द बीमारों को मतलब कुछ भी हो हारने ...

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बिन साजन के सावन कैसा - धर्मेन्द्र राजमंगल
बिन साजन के सावन कैसा - धर्मेन्द्र राजमंगल

बारिश की बूंदों से जलती हीय में मेरे आज सुलगती पीपल के पत्तो की फडफड, जैसे दिल की धडकन धडधड चूल्हे पर चढ़ गयी कढाई, दूर हुई दिल की तन्हाई ...

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चाँद में इतनी जुर्रत कहाँ है - आतिफ
चाँद में इतनी जुर्रत कहाँ है - आतिफ

सामने हों गर आँखे तेरी तो समन्दर की ज़रूरत कहाँ है लिपटी हो मेरे सीने से तू तो फिर कोई और हसरत कहाँ है ढूँढता फिर रहा था जिस जन्नत को इ...

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ना जाने क्यूं लड़कियों के अपने घर नहीं होते - शकुंतला सरुपरिया
ना जाने क्यूं लड़कियों के अपने घर नहीं होते - शकुंतला सरुपरिया

ना जाने क्यूं लड़कियों के अपने घर नहीं होते जो उड़ना चाहें अंबर पे, तो अपने पर नहीं होते आंसू दौलत, डाक बैरंग, बंजारन-सी जिंदगानी सिवा ...

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महकते गुलशनों में तितलियाँ आती ही आती हैं  - वीरेन्द्र खरे 'अकेला'
महकते गुलशनों में तितलियाँ आती ही आती हैं - वीरेन्द्र खरे 'अकेला'

महकते गुलशनों में तितलियाँ आती ही आती हैं अगर दिल साफ़ रक्खो नेकियाँ आती ही आती हैं मैं उससे कम ही मिलता हूँ, सुना है मैंने लोगों से ज़िय...

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करें जब पाँव खुद नर्तन, समझ लेना कि होली है - नीरज गोस्वामी
करें जब पाँव खुद नर्तन, समझ लेना कि होली है - नीरज गोस्वामी

करें जब पाँव खुद नर्तन, समझ लेना कि होली है हिलोरें ले रहा हो मन, समझ लेना कि होली है किसी को याद करते ही अगर बजते सुनाई दें कहीं घुँ...

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तीन औरते - मुहम्मद अल्वी
तीन औरते - मुहम्मद अल्वी

अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर मुहम्मद अल्वी साहब की लिखी एक नज्म पेश है : घर से बाहर आँगन में खाट पे बैठी तीन औरतें खुसुर-पुसुर करती है...

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