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shola aligarhi
दिल की इक हर्फ़ ओ हिकायात है ये भी न सही
गर मिरी बात में कुछ बात है ये भी न सही

ईद को भी वो नहीं मिलते हैं मुझ से न मिलें
इक बरस दिन की मुलाक़ात है ये भी न सही

दिल में जो कुछ है तुम्हारे नहीं पिन्हाँ मुझ से
ज़ाहिरी लुत्फ़ ओ मुदारात है ये भी न सही

ज़िंदगी हिज्र में भी यूँ ही गुज़र जाएगी
वस्ल की एक ही रात है ये भी न सही

मेरी तुर्बत पे लगाते नहीं ठोकर न लगाओ
ये ही बस उन की करामात है ये भी न सही

काट सकते हैं गला ख़ुद भी न कीजिए हमें क़त्ल
आप के हाथ में इक बात है ये भी न सही

क़त्ल-ए-क़ासिद पे कमर बाँधी हैं ‘शोला’ उस ने
ख़त किताबत की मुलाक़ात है ये भी न सही - शोला - 'शोला' अलीगढ़ी

Roman

dil ki ek harf o hikayat hai ye bhi sahi
gar miri baat me kuch baat hai ye bhi n sahi

ied ko bhi wo nahi milte hai mujh se n mile
ik baras din ki mulakat hai ye bhi n sahi

Dil me jo kuch hai tumhare nahi pinha mujh se
zihiri lutf o mudarat hai ye bhi n sahi

zindgi hizr me bhi yun hi gujar jayegi
wasl ki ek hi raat hai ye bhi n sahi

meri turbat pe lagate nahi thokar n lagao
ye hi bas un ki karamat hai ye bhi n sahi

kaat sakte hai gala khud bhi n kijiye hame qatl
aap ke haath me ik baat hai ye bhi n sahi

qatl-e-kasid pe kamar bandhi hai 'Shola' us ne
khat kitabat ki mulakat hai ye bhi n sahi - Shola Aligarhi

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  1. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति .... Nice article with awesome explanation ..... Thanks for sharing this!! :) :)

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