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आज के दौर में ऐसा भी तो होता है बहुत - साजिद हाश्मी
आज के दौर में ऐसा भी तो होता है बहुत - साजिद हाश्मी

साजिद हाश्मी आपका जन्म 7 जनवरी 1955 को राजगढ़, ब्यावरा, म.प्र. में मुहम्मद हयात हाश्मी के यहाँ हुआ | आप वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन के रा...

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जब से गई है माँ मेरी रोया नहीं - कवि कुलवंत सिंह
जब से गई है माँ मेरी रोया नहीं - कवि कुलवंत सिंह

जब से गई है माँ मेरी, रोया नहीं बोझिल हैं पलकें फिर भी मैं सोया नहीं ऐसा नहीं आँखे मेरी नम हुई न हों, आँचल नहीं था पास फिर रोया नहीं ...

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साफ़ ज़ाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं - अख्तर अंसारी
साफ़ ज़ाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं - अख्तर अंसारी

साफ़ ज़ाहिर है निगाहों से कि हम मरते हैं मुँह से कहते हुए ये बात मगर डरते हैं एक तस्वीर-ए-मुहब्बत है जवानी गोया जिस में रंगो की एवज़ ख़...

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बोले बग़ैर हिज्र का क़िस्सा सुना गया  - वीरेन्द्र खरे 'अकेला'
बोले बग़ैर हिज्र का क़िस्सा सुना गया - वीरेन्द्र खरे 'अकेला'

बोले बग़ैर हिज्र का क़िस्सा सुना गया सब दिल का हाल आपका चेहरा सुना गया इस दौर में किसी को किसी का नहीं लिहाज़ बातें हज़ार अपना ही बेटा ...

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मैं जो रास्ते पे चल पड़ी - मीना कुमारी नाज़
मैं जो रास्ते पे चल पड़ी - मीना कुमारी नाज़

आज यानि ३१ मार्च को मीना कुमारी जी की पुण्यतिथि है | आपको अपनी फ़िल्मी अदाकारी के लिए जाना जाता है पर अपने जीवन में देखे गए दर्दो ने आपको एक...

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अदावत दिल में रखते हैं मगर यारी दिखाते हैं - विरेन्द्र खरे अकेला
अदावत दिल में रखते हैं मगर यारी दिखाते हैं - विरेन्द्र खरे अकेला

अदावत दिल में रखते हैं मगर यारी दिखाते हैं न जाने लोग भी क्या क्या अदाकारी दिखाते हैं यक़ीनन उनका जी भरने लगा है मेज़बानी से वो कुछ दिन...

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आओ मिलकर गले इस नये साल में - अभिषेक कुमार अम्बर
आओ मिलकर गले इस नये साल में - अभिषेक कुमार अम्बर

आप सभी को गुडी पड़वा की हार्दिक शुभकामनाए आओ मिलकर गले इस नये साल में भूल जायें गिले इस नये साल में। घर न कोई जले इस नये साल में ...

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जब कुछ नहीं बना तो हमने इतना कर दिया - रमेश तैलंग
जब कुछ नहीं बना तो हमने इतना कर दिया - रमेश तैलंग

जब कुछ नहीं बना तो हमने इतना कर दिया.. खाली हथेली पर दुआ का सिक्का धर दिया। कब तक निभाते दुश्मनी हम वक्त से हर दिन इस बार जब मिला वो ...

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आया तेरा ख़याल कि आये हसीन ख़्वाब - विरेन्द्र खरे अकेला
आया तेरा ख़याल कि आये हसीन ख़्वाब - विरेन्द्र खरे अकेला

आया तेरा ख़याल कि आये हसीन ख़्वाब दिल में न जाने कितने समाये हसीन ख़्वाब उस हादसे में यार सभी कुछ तो लुट गया मुश्किल से जैसे तैसे बचाये...

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कर चुके हम फ़ैसला अब कुछ भी हो- राज़िक़ अंसारी
कर चुके हम फ़ैसला अब कुछ भी हो- राज़िक़ अंसारी

कर चुके हम फ़ैसला अब कुछ भी हो इश्क़ में इस दिल का यारब कुछ भी हो चारा साज़ों को नहीं कोई ग़रज़ दर्द बीमारों को मतलब कुछ भी हो हारने ...

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बिन साजन के सावन कैसा - धर्मेन्द्र राजमंगल
बिन साजन के सावन कैसा - धर्मेन्द्र राजमंगल

बारिश की बूंदों से जलती हीय में मेरे आज सुलगती पीपल के पत्तो की फडफड, जैसे दिल की धडकन धडधड चूल्हे पर चढ़ गयी कढाई, दूर हुई दिल की तन्हाई ...

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चाँद में इतनी जुर्रत कहाँ है - आतिफ
चाँद में इतनी जुर्रत कहाँ है - आतिफ

सामने हों गर आँखे तेरी तो समन्दर की ज़रूरत कहाँ है लिपटी हो मेरे सीने से तू तो फिर कोई और हसरत कहाँ है ढूँढता फिर रहा था जिस जन्नत को इ...

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ना जाने क्यूं लड़कियों के अपने घर नहीं होते - शकुंतला सरुपरिया
ना जाने क्यूं लड़कियों के अपने घर नहीं होते - शकुंतला सरुपरिया

ना जाने क्यूं लड़कियों के अपने घर नहीं होते जो उड़ना चाहें अंबर पे, तो अपने पर नहीं होते आंसू दौलत, डाक बैरंग, बंजारन-सी जिंदगानी सिवा ...

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महकते गुलशनों में तितलियाँ आती ही आती हैं  - वीरेन्द्र खरे 'अकेला'
महकते गुलशनों में तितलियाँ आती ही आती हैं - वीरेन्द्र खरे 'अकेला'

महकते गुलशनों में तितलियाँ आती ही आती हैं अगर दिल साफ़ रक्खो नेकियाँ आती ही आती हैं मैं उससे कम ही मिलता हूँ, सुना है मैंने लोगों से ज़िय...

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करें जब पाँव खुद नर्तन, समझ लेना कि होली है - नीरज गोस्वामी
करें जब पाँव खुद नर्तन, समझ लेना कि होली है - नीरज गोस्वामी

करें जब पाँव खुद नर्तन, समझ लेना कि होली है हिलोरें ले रहा हो मन, समझ लेना कि होली है किसी को याद करते ही अगर बजते सुनाई दें कहीं घुँ...

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तीन औरते - मुहम्मद अल्वी
तीन औरते - मुहम्मद अल्वी

अन्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर मुहम्मद अल्वी साहब की लिखी एक नज्म पेश है : घर से बाहर आँगन में खाट पे बैठी तीन औरतें खुसुर-पुसुर करती है...

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मुझे ग़ुस्सा दिखाया जा रहा है - शेरी भोपाली
मुझे ग़ुस्सा दिखाया जा रहा है - शेरी भोपाली

मुझे ग़ुस्सा दिखाया जा रहा है तबस्सुम को चबाया जा रहा है वहीं तक आबरू में ज़ब्त-ए-ग़म है जहाँ तक मुस्कुराया जा रहा है दो आलम मैंने छोड़े ज...

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नई आस्तीन -  शकील आज़मी
नई आस्तीन - शकील आज़मी

न मेरे ज़हर में तल्ख़ी रही वो पहली सी बदन में उस के भी पहला सा ज़ाइक़ा/ज़ायका न रहा हमारे बीच जो रिश्ते थे सब तमाम हुए बस एक रस्म बच...

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ग़ज़ब है जुस्तजू-ए-दिल का ये अंजाम हो जाए - शेरी भोपाली
ग़ज़ब है जुस्तजू-ए-दिल का ये अंजाम हो जाए - शेरी भोपाली

ग़ज़ब है जुस्तजू-ए-दिल का ये अंजाम हो जाए कि मंज़िल दूर हो और रास्ते में शाम हो जाए वही नाला वही नग़्मा बस इक तफ़रीक़-ए-लफ़्ज़ी है ...

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दिल की इक हर्फ़ ओ हिकायात है ये भी न सही - शोला अलीगढ़ी
दिल की इक हर्फ़ ओ हिकायात है ये भी न सही - शोला अलीगढ़ी

दिल की इक हर्फ़ ओ हिकायात है ये भी न सही गर मिरी बात में कुछ बात है ये भी न सही ईद को भी वो नहीं मिलते हैं मुझ से न मिलें इक बरस दिन ...

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ज़िन्दगी की उड़ान से हट जाएं - राज़िक़ अंसारी
ज़िन्दगी की उड़ान से हट जाएं - राज़िक़ अंसारी

ज़िन्दगी की उड़ान से हट जाएं हम अगर तेरे ध्यान से हट जाएं जान जिनको अज़ीज़ है अपनी इश्क़ के इम्तिहान से हट जाएं मेरा वादा, लकीर पत्...

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खुदा को ही अब साँचों मे उतरना पडेगा - avanindra singh
खुदा को ही अब साँचों मे उतरना पडेगा - avanindra singh

उतरेंगे फलक से तो जमीन पर चलना पडेगा, सितारों को कदम कदम पर सभँलना पडेगा। तरह तरह के रंग दिखाती इस दुनिया में, तुझे आईने की तरह ढलना पड...

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देंगे हम जान इस तिरंगे पर - अभिषेक कुमार अम्बर
देंगे हम जान इस तिरंगे पर - अभिषेक कुमार अम्बर

देंगे हम जान इस तिरंगे पर, अपना ईमान इस तिरंगे पर। हमको अभिमान इस तिरंगे पर, देश का मान इस तिरंगे पर। मेरे तो खून का है हर कतरा, आ...

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 हुआ सवेरा हमें आफ़ताब मिल ही गया  - वीरेन्द्र खरे अकेला
हुआ सवेरा हमें आफ़ताब मिल ही गया - वीरेन्द्र खरे अकेला

Virendra Khare Akela हुआ सवेरा हमें आफ़ताब मिल ही गया अँधेरी शब को करारा जवाब मिल ही गया अगरचे हो गयीं काँटों से उंगलियाँ ज़ख़्मी ...

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वक़्त यूँ ही न गँवाओ कि नया साल है आज - कुलदीप सलिल
वक़्त यूँ ही न गँवाओ कि नया साल है आज - कुलदीप सलिल

वक़्त यूँ ही न गँवाओ कि नया साल है आज दोस्तो, जाम उठाओ, कि नया साल है आज और होता कोई दिन तो कोई बात न थी आज पहलू से न जाओ कि नया साल ...

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