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अब आप चलो तुम अपने बोझ उठाए - जमीलुद्दीन आली
अब आप चलो तुम अपने बोझ उठाए - जमीलुद्दीन आली

जमीलुद्दीन आली भारत में जन्मे ( 20 जनवरी 1925 ) और पाकिस्तान में मृत्यु को प्राप्त हुए | मशहूर शायर थे | बीमारी के चलते आज ही के दिन ( 23 न...

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मुझको ही ऐसा लगता है या सचमुच ही हो जाता है - मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
मुझको ही ऐसा लगता है या सचमुच ही हो जाता है - मुज़फ़्फ़र हनफ़ी

मुझको ही ऐसा लगता है या सचमुच ही हो जाता है मै बातें तुमसे करता हूं चांद गुलाबी हो जाता है उस दिल के क्या कहने जिसमे गम के कांटे डूब ग...

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खावर रिजवी जीवन परिचय
खावर रिजवी जीवन परिचय

खावर रिज़वी साहब का जन्म 1 जून 1938 को हुआ | इनके जन्म के साल में कुछ गफलत है कुछ लोग इसे 1936 बताते है | आपका असल नाम सय्यद सिब्ते हस...

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मैं इसके नाज़ उठाता हूँ सो यह ऐसा नहीं करती - मुनव्वर राना
मैं इसके नाज़ उठाता हूँ सो यह ऐसा नहीं करती - मुनव्वर राना

बाल दिवस पर आप सभी को शुभकामनाए और बच्चो को प्यार .. मुनव्वर साहब वैसे भी रिश्तों को बखूबी अपनी ग़ज़ल में समेट लेते है और खासकर माँ को .. ...

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 सितारों से आगे जहाँ और भी हैं - अल्लामा इकबाल
सितारों से आगे जहाँ और भी हैं - अल्लामा इकबाल

आज अल्लामा इकबाल की १४० वी जयंती है इस अवसर पर उनकी यह ग़ज़ल पेश है :- सितारों से आगे जहाँ और भी हैं अभी इश्क़ के इम्तिहाँ और भी हैं त...

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बहादुर शाह ज़फर जीवन परिचय
बहादुर शाह ज़फर जीवन परिचय

भारत के अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर उर्दू के जाने माने शायर थे | बहादुर शाह ज़फर का जन्म 24 अक्टूम्बर 1775 में हुआ था | आपके पिता अकब...

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 शब को दलिया दला करे कोई  - सय्यद ज़मीर जाफरी
शब को दलिया दला करे कोई - सय्यद ज़मीर जाफरी

शब को दलिया दला करे कोई सुब्ह को नाश्ता करे कोई इस का भी फ़ैसला करे कोई किस से कितना हया करे कोई आदमी से सुलूक दुनिया का जैसे अण्डा ...

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कभी कभी बेहद डर लगता है  - सज्जाद ज़हीर
कभी कभी बेहद डर लगता है - सज्जाद ज़हीर

सज्जाद ज़हीर साहब के जन्मदिवस के मौके पर उनकी यह नज़्म पेश है : कभी कभी बेहद डर लगता है कि दोस्ती के सब रुपहले रिश्ते प्यार के सारे स...

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अब्दुल कावी देसनवी जीवनी
अब्दुल कावी देसनवी जीवनी

आज अपने गूगल डूडल में अब्दुल कावी देसनवी का नाम जरुर पड़ा होगा | ये वो उर्दू के लेखक थे जिनकी वजह से हमें आज जावेद अख्तर , मुजफ्फर हनफी ...

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दिल माँगे है मौसम फिर उम्मीदों का - समीना राजा
दिल माँगे है मौसम फिर उम्मीदों का - समीना राजा

समीना राजा पकिस्तान की मशहूर लेखक, शायरा, शिक्षाविद थी | आप इस्लामाबाद में रहती थी | समीना राजा का जन्म बहवालपुर पकिस्तान में हुआ, आपने प...

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सूर्य से भी पार पाना चाहता है - विरेन्द्र खरे अकेला
सूर्य से भी पार पाना चाहता है - विरेन्द्र खरे अकेला

सूर्य से भी पार पाना चाहता है इक दिया विस्तार पाना चाहता है देखिए, इस फूल की ज़िद देखिए तो पत्थरों से प्यार पाना चाहता है किस क़दर है स...

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सारे मौसम बदल गए शायद - अलीना इतरत
सारे मौसम बदल गए शायद - अलीना इतरत

Aleena Itrat सारे मौसम बदल गए शायद और हम भी सँभल गए शायद झील को कर के माहताब सुपुर्द अक्स पा कर बहल गए शायद एक ठहराव आ गया कैसा...

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फिर बताओ कैसे सोच का विस्तार हो - अदम गोंडवी
फिर बताओ कैसे सोच का विस्तार हो - अदम गोंडवी

अदम गोंडवी के जन्मदिवस / जयंती पर उनकी एक ग़ज़ल पेश है : टी.वी. से अखबार तक गर सेक्स की बौछार हो फिर बताओ कैसे अपनी सोच का विस्तार हो ...

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 खूब पहचान लो 'असरार' हूँ मै ( मजाज़ लखनवी )
खूब पहचान लो 'असरार' हूँ मै ( मजाज़ लखनवी )

कल यानि १९ अक्टूम्बर को मजाज़ का जन्मदिवस था इस अवसर पर उन पर एक लेख है आशा है आप सभी को पसंद आएगा [ यह लेख मजाज़ पर लिखी गयी किताब मजाज़ और ...

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दीपावली पर कुछ अशआर
दीपावली पर कुछ अशआर

दीपो के पर्व दीपावली / दिवाली पर शायरो के कुछ अशआर : रो रहा था गोद में अम्माँ की इक तिफ़्ल-ए-हसीं इस तरह पलकों पे आँसू हो रहे थे बे-क...

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 इक दिया नाम का आज़ादी के - कैफी आज़मी
इक दिया नाम का आज़ादी के - कैफी आज़मी

दीपावली और दीपो के पर्व पर कैफी आज़मी साहब की यह नज़्म पेश है : एक दो भी नहीं छब्बीस दिए एक एक करके जलाये मैंने इक दिया नाम का आज़ादी के...

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मत पूछो कितना गमगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी - जाँन एलिया
मत पूछो कितना गमगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी - जाँन एलिया

मत पूछो कितना गमगीं हूँ गंगा जी और जमुना जी ज्यादा मै तुमको याद नहीं हूँ गंगा जी और जमुना जी अपने किनारों से कह दीजो आंसू तुमको रोते है ...

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तुम अपनी खुदनुमाई की शौहरत के चाव में-  रईस फिगार
तुम अपनी खुदनुमाई की शौहरत के चाव में- रईस फिगार

तुम अपनी खुदनुमाई की शौहरत के चाव में। डालो न अपने हाथ को जलते अलाव में।। लहजा भी भूल बैठा है वो गुफ्तुगू का अब। लगता है जी रहा है वो भ...

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मेरे रश्क-ए-क़मर तुने पहली नज़र - फ़ना बुलंद शहरी
मेरे रश्क-ए-क़मर तुने पहली नज़र - फ़ना बुलंद शहरी

" मेरे रश्क-ऐ-कमर तेरी पहली नज़र " यह गीत या असल में यूँ कहे ग़ज़ल आपने जरुर सुनी होगी और कानो में इसकी धून आते ही गुनगुनाई भी होगी |...

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हद से ज्यादा भी प्यार मत करना - कमर एजाज़
हद से ज्यादा भी प्यार मत करना - कमर एजाज़

हद से ज्यादा भी प्यार मत करना दिल हर एक पे निसार मत करना क्या खबर किस जगह पे रुक जाये सास का एतबार मत करना आईने की नज़र न लग जाये इस ...

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सोच रहा है इतना क्यूँ   - शाहीद कमाल
सोच रहा है इतना क्यूँ - शाहीद कमाल

सोच रहा है इतना क्यूँ ऐ दस्त-ए-बे-ताख़ीर निकाल तू ने अपने तरकश में जो रक्खा है वो तीर निकाल जिस का कुछ अंजाम नहीं वो जंग है दो नक़्क़...

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समझता हूँ मैं सब कुछ सिर्फ़ समझाना नहीं आता - अख्तर अंसारी
समझता हूँ मैं सब कुछ सिर्फ़ समझाना नहीं आता - अख्तर अंसारी

समझता हूँ मैं सब कुछ सिर्फ़ समझाना नहीं आता तड़पता हूँ मगर औरों को तड़पाना नहीं आता ये जमुना की हसीं आवाज क्यूँ अर्गन बजाती हैं मुझे...

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अब तो ये भी नहीं रहा एहसास - जिगर मुरादाबादी
अब तो ये भी नहीं रहा एहसास - जिगर मुरादाबादी

अब तो ये भी नहीं रहा एहसास दर्द होता है या नहीं होता इश्क़ जब तक न कर चुके रुस्वा आदमी काम का नहीं होता टूट पड़ता है दफ़अ'तन जो...

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चलो चल कर वहीं पर बैठते हैं  - राज़िक़ अंसारी
चलो चल कर वहीं पर बैठते हैं - राज़िक़ अंसारी

चलो चल कर वहीं पर बैठते हैं जहां पर सब बराबर बैठते हैं न जाने क्यों घुटन सी हो रही है बदन से चल के बाहर बैठते हैं हमारी हार का ऐलान ह...

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कहाँ है मेरा हिन्दोस्तान  - अजमल सुल्तानपुरी
कहाँ है मेरा हिन्दोस्तान - अजमल सुल्तानपुरी

सभी पाठकों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाए मुसलमाँ और हिन्दू की जान  कहाँ है मेरा हिन्दोस्तान  मैं उस को ढूँढ रहा हूँ  म...

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आज़ादी
आज़ादी

शेरों को आज़ादी है आज़ादी के पाबंद रहें जिसको चाहें चीरें फाड़ें खायें पियें आनंद रहें शाहीं को आज़ादी है आज़ादी से परवाज़ करे नन्ही मु...

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हमारा झंडा - मजाज़ लखनवी
हमारा झंडा - मजाज़ लखनवी

शेर हैं चलते हैं दर्राते हुए बादलों की तरह मंडलाते हुए ज़िंदगी की रागिनी गाते हुए आज झंडा है हमारे हाथ में हाँ यह सच है भूक से हैरान ह...

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उसको पढ़ने को जी मचलता है - आदिल लखनवी
उसको पढ़ने को जी मचलता है - आदिल लखनवी

उसको पढ़ने को जी मचलता है, हुस्न उसका किताब जैसा है । तुम चिराग़ों की बात करते हो, हमने सूरज को बुझते देखा है । खाक उड़़कर जमीं पे आत...

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तेरा सब कुछ मेरे अंदर बम भोले, - आलोक श्रीवास्तव
तेरा सब कुछ मेरे अंदर बम भोले, - आलोक श्रीवास्तव

तेरा सब कुछ मेरे अंदर बम भोले, मंदिर मस्जिद कंकर पत्थर बम भोले घर से दूर न भेज मुझे रोटी लाने, सात गगन हैं, सात समंदर बम भोले कल सपने...

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मेरी वफाये याद करोगे, रोओगे फरयाद करोगे ? - मुहम्मद बिन तासीर
मेरी वफाये याद करोगे, रोओगे फरयाद करोगे ? - मुहम्मद बिन तासीर

मेरी वफाये याद करोगे, रोओगे फरयाद करोगे ? मुझको तो बर्बाद किया है, और किसे बर्बाद करोगे ? हम भी हसेंगे तुम पर एक दिन, तुम भी कभी फरयाद क...

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तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो, - शबीना अदीब
तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो, - शबीना अदीब

तुम मुझे छोड़ के मत जाओ मेरे पास रहो, दिल दुखे जिससे अब ऐसी न कोई बात कहो, रोज़ रोटी के लिए अपना वतन मत छोड़ो, जिसको सींचा है लहू से वो च...

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