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ऊँचा है पर्वत - अशोक बाबू माहौर
ऊँचा है पर्वत - अशोक बाबू माहौर

  ऊँचा है पर्वत कद उसका ऊँचा न झुका न झुकेगा अटल हैं इरादे विश्वास के अम्बार खड़ा मूक अविचल बनकर स्तम्भ सा सीना ताने | हवाए...

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आसमाँ मिल न सका, धरती पे आया न गया - इमरान हुसैन आज़ाद
आसमाँ मिल न सका, धरती पे आया न गया - इमरान हुसैन आज़ाद

आसमाँ मिल न सका, धरती पे आया न गया ज़िन्दगी हमसे कोई ठौर बनाया न गया घर की वीरानियाँ रुसवा हुईं बेकार में ही मुझसे बाज़ार में भी वक़्त ब...

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 नाशाद हूँ पहले ही अब दिल न दुखाओ तुम - महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश
नाशाद हूँ पहले ही अब दिल न दुखाओ तुम - महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश

नाशाद हूँ पहले ही अब दिल न दुखाओ तुम इस रक्से-मुहब्बत से मत और रिझाओ तुम भूला न अभी तक हूँ अंजाम मुहब्बत का नग़मा-ए- वफ़ा गा कर फिर से ...

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बाबूजी - आलोक श्रीवास्तव
बाबूजी - आलोक श्रीवास्तव

बड़ी मशहूर ग़ज़ल है आलोक श्रीवास्तव जी की बाबूजी आप सबके लिए पेश है : घर की बुनियादें, दीवारें, बामो-दर थे बाबूजी सबको बांधे रखने वाला ख़ास...

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होंठ सींकर जख्म मेरे अधखुले से रह गये - कमलेश संजीदा
होंठ सींकर जख्म मेरे अधखुले से रह गये - कमलेश संजीदा

होंठ सींकर जख्म मेरे अधखुले से रह गये दिल की उस वेदना को भी बस सीने में दबाकर रह गये दूसरों के जख्म सींकर खुद के इतने उघड गये ढकने को तो...

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हमारा देश - इब्ने इंशा
हमारा देश - इब्ने इंशा

आज इब्ने इंशा जी का जन्म दिवस आज याने १५ जून को है इस मौके पर उनकी यह रचना पेश है आशा है आपको यह पसंद आएगी " ईरान में कौन रहता है? &...

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इश्क़ का रोग भला कैसे पलेगा मुझसे - प्रखर मालवीय 'कान्हा'
इश्क़ का रोग भला कैसे पलेगा मुझसे - प्रखर मालवीय 'कान्हा'

इश्क़ का रोग भला कैसे पलेगा मुझसे क़त्ल होता ही नहीं यार अना का मुझसे गर्म पानी की नदी खुल गयी सीने पे मेरे कल गले लग के बड़ी देर वो रोय...

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काबा की बात कर न शिवाले की बात कर -दिनेश पाण्डेय "दिनकर"
काबा की बात कर न शिवाले की बात कर -दिनेश पाण्डेय "दिनकर"

यह ग़ज़ल दिनेश जी की फेसबुक टाइमलाइन से लिया गया है : काबा की बात कर न शिवाले की बात कर, न भ्रष्टाचार ना ही घोटाले की बात कर। मोहताज हो ...

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