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आज सुबह बड़ी दुखद खबर आई उर्दू शायरी के बुजुर्गो में शामिल पद्मश्री बेकल उत्साही साहब अब नहीं रहे | और साथ ही साथ कल रऊफ़ रज़ा साहब भी इस दुनिया में नहीं रहे खुदा उन्हें जन्नत अता फरमाए |
bekal utsahi बेकल उत्साही शायरी

बेकल साहब और रऊफ़ रज़ा  साहब को विनम्र श्रद्धांजलि.

वो तो मुद्दत से जानता है मुझे
फिर भी हर इक से पूछता है मुझे

रात तनहाइयों के आंगन में
चांद तारों से झाँकता है मुझे

सुब्‌ह अख़बार की हथेली पर
सुर्ख़ियों मे बिखेरता है मुझे

होने देता नही उदास कभी
क्या कहूँ कितना चाहता है मुझे

मैं हूँ बेकल मगर सुकून से हूँ
उसका ग़म भी सँवारता है मुझे- बेकल उत्साही

Roman

wo to muddat se janta hai mukhe
phir bhi har ek se puchta hai mujhe

raat tanhaiyo ke aangan me
chand taaro se jhakta hai mujhe

subah akhbar ki hatheli par
surkhiyo me bikherata hai mujhe

hone deta nahi udas kabhi
kya kahu kitna chahta hai mujhe

mai hu bekal magar sukoon se hun
uska gham bhi swarata hai mujhe-Bekal Utsahi

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