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अभिषेक कुमार अम्बर जखीरा में शामिल होने वाले सबसे कम उम्र के लेखक है | आपका जन्म 07 मार्च 2000 को मवाना मेरठ उत्तर प्रदेश में हुआ | आप हास्य व्यंग्य, ग़ज़ल, गीत, छंद आदि लिखते है। तेरह वर्ष (2004 से ) की आयु से निरंतर हिंदी और उर्दू साहित्य के लिए समर्पित हैं। आप मशहूर शायरा अंजुम रहबर जी के शिष्य हैं।

abhishek kumar ambar shayari hindi

ख्वाब आँखों में जितने पाले थे,
टूट कर के बिखर ने वाले थे।

जिनको हमने था पाक दिल समझा,
उन्हीं लोगों के कर्म काले थे।

पेड़ होंगे जवां तो देंगे फल,
सोच कर के यही तो पाले थे।

सबने भर पेट खा लिया खाना,
माँ की थाली में कुछ निवाले थे।

आज सब चिट्ठियां जला दी वो,
जिनमें यादें तेरी सँभाले थे।

हाल दिल का सुना नहीं पाये,
मुँह पे मजबूरियों के ताले थे। - अभिषेक कुमार अम्बर

Roman

Khwab aankho me jitne pale the
tutu kar ke bikharne wale the

jinko hamne tha pak dil samjha
unhi logo ke karm pale the

ped honge jawa to denge fal
soch kar ke yahi to pale the

sabne bhar pet kha liya khana
maa ki thali me kuch niwale the

aaj sab chitthiya jala di wo
jinme yade teri sambhale the

haal dil ka suna nahi paye
muh pe majburiyo ke tale the - Abhishek Kumar Ambar

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