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मीना कुमारी जी के जन्मदिन के अवसर पर उनकी यह ग़ज़ल पेश है | आशा आप सभी को पसंद आएगी
उदासियो ने मेरी आत्मा को घेरा है
रुपहली चांदनी है और घुप अँधेरा है

कही-कही कोई तारा कही-कही जुगनू है
जो मेरी रात थी वह आपका सवेरा है

कदम-कदम पे बबूलो को तोड़ने जाए
इधर से गुजरेगा तू, रास्ता यह तेरा है

उफ़क के पार जो देखी है रौशनी तुमने
यह रौशनी है खुदा जाने या अँधेरा है

सहर से शाम हुई, शाम को यह रात मिली
हर एक रंग समय का बहुत घनेरा है

खुदा के वास्ते गम को भी तुम न बहलाओ
इसे तो रहने दो, मेरा, यही तो मेरा है - मीना कुमारी नाज़

Roman

udasiyo ne meri aatma ko ghera hai
ruphali chandni hai aur ghup andhera hai

kahi-kahi koi tara kahi-kahi jugnu hai
jo meri raat thi wah aapka sawera hai

kadam-kadam pe babulo ko todne jaye
idhar se gujrega tu, rasta yah tera hai

ufaq ke paar jo dekhi hai roshni tumne
yah roshni hai khuda jane ya andhera hai

sahar se sham hui, sham ko yah raat mili
har ek rang smay ka bahut ghanera hai

khuda ke waste gham ko bhi tum n bahlao
ise to rahne do, mera, yahi to mera hai - Meena Kumari Naaz
#jakhira

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  1. great information … thank you for sharing

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