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दिल में रहने की फिर उम्मीद लगायी जाए  - हिलाल बदायुनी
दिल में रहने की फिर उम्मीद लगायी जाए - हिलाल बदायुनी

दिल में रहने की फिर उम्मीद लगायी जाए ! पहले दिल दिल में कोई राह बनायीं जाए !! जिसमे सच्चाई की लज्ज़त हो वफ़ा की खुशबु ! मुंह से बस ऐ...

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आख़िरी टीस आज़माने को - अदा जाफ़री
आख़िरी टीस आज़माने को - अदा जाफ़री

आख़िरी टीस आज़माने को जी तो चाहा था मुस्कुराने को याद इतनी भी सख़्तजाँ तो नहीं इक घरौंदा रहा है ढहाने को संगरेज़ों में ढल गये आँसू लोग...

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एक ख्वाहिश है बस - अभिषेक कुमार अम्बर
एक ख्वाहिश है बस - अभिषेक कुमार अम्बर

एक ख्वाहिश है बस दीवाने की, तेरी आँखों में डूब जाने की। साथ जब तुम निभा नहीं पाते , क्या जरूरत थी दिल लगाने की। आज जब आस छोड़ दी मैं...

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वो तो मुद्दत से जानता है मुझे - बेकल उत्साही
वो तो मुद्दत से जानता है मुझे - बेकल उत्साही

आज सुबह बड़ी दुखद खबर आई उर्दू शायरी के बुजुर्गो में शामिल पद्मश्री बेकल उत्साही साहब अब नहीं रहे | और साथ ही साथ कल  रऊफ़ रज़ा  साहब भी इस द...

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उर्दू शायरी के प्रकार
उर्दू शायरी के प्रकार

उर्दू जबान अपने आप में बेहद मीठी जबान है और फिर इस जबान में शायरी का क्या कहना यह तो सोने पे सुहागा होती है | उर्दू शायरी वैसे तो खालिस उर्द...

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अब काम दुआओं के सहारे नहीं चलते - शकील जमाली
अब काम दुआओं के सहारे नहीं चलते - शकील जमाली

अब काम दुआओं के सहारे नहीं चलते अब काम दुआओं के सहारे नहीं चलते चाबी न भरी हो तो खिलौने नहीं चलते अब खेल के मैदान से लौटो मेरे बच्च...

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दश्ते-वहशत का सफ़र लगता है  - इम्तियाज़ सागर
दश्ते-वहशत का सफ़र लगता है - इम्तियाज़ सागर

दश्ते-वहशत का सफ़र लगता है इश्क़ भी कारे-हुनर लगता है शाख़ मौसम के सितम झेलती है फिर कहीं जा के समर लगता है हम की जिस राह पे चल निकले है...

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तीरो-तलवार से नहीं होता - महावीर उत्तरांचली
तीरो-तलवार से नहीं होता - महावीर उत्तरांचली

महावीर उत्तरांचली साहब उत्तराखंड के रहने वाले है आपका जन्म दिल्ली में २४ जुलाई १९७१ को हुआ | आप वर्तमान में गाज़ियाबाद से प्रकाशित त्रेमास...

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ख्वाब आँखों में जितने पाले थे - अभिषेक कुमार अम्बर
ख्वाब आँखों में जितने पाले थे - अभिषेक कुमार अम्बर

अभिषेक कुमार अम्बर जखीरा में शामिल होने वाले सबसे कम उम्र के लेखक है | आपका जन्म 07 मार्च 2000 को मवाना मेरठ उत्तर प्रदेश में हुआ | आप हा...

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सफ़र से लौट जाना चाहता है - शकील जमाली
सफ़र से लौट जाना चाहता है - शकील जमाली

सफ़र से लौट जाना चाहता है परिन्दा आशियाना चाहता है कोई स्कूल की घंटी बजा दे ये बच्चा मुस्कुराना 😊 चाहता है उसे रिश्ते थमा देती है...

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बच्चो पर कुछ अशआर...
बच्चो पर कुछ अशआर...

आप सभी के लिए आज बच्चो पर कुछ शेर पेश है आशा है आप सभी को जरुर पसंद आयेंगे.. घर से मस्जिद है बहुत दूर तो चलो यूँ कर लें किसी रोते हु...

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श्रीराम बोलना भी सियासत में आ गया - गोपाल कृष्ण सक्सेना "पंकज"
श्रीराम बोलना भी सियासत में आ गया - गोपाल कृष्ण सक्सेना "पंकज"

गोपाल कृष्ण सक्सेना २६ फरवरी १९३४ को उत्तर प्रदेश के उरई में जन्मे | आप ने अंग्रेजी साहित्य में एम ए किया और आप सागर विश्वविद्यालय में अ...

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नई हुई फिर रस्म पुरानी दीवाली के दीप जले - फ़िराक गोरखपुरी
नई हुई फिर रस्म पुरानी दीवाली के दीप जले - फ़िराक गोरखपुरी

नई हुई फिर रस्म पुरानी दिवाली के दीप जले शाम सुहानी रात सुहानी दिवाली के दीप जले धरती का रस डोल रहा है दूर-दूर तक खेतों के लहराये वो ...

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उसकी खुशबू मेरी गज़लों में सिमट आई है - इकबाल अशहर
उसकी खुशबू मेरी गज़लों में सिमट आई है - इकबाल अशहर

उसकी खुशबू मेरी गज़लों में सिमट आई है नाम का नाम है रुसवाई की रुसवाई है दिल है एक और दो आलम का तमन्नाई है दोस्त का दोस्त है हरजाई का हरज...

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तंग आ चुके हैं कशमकश ज़िन्दगी से हम  - साहिर लुधियानवी
तंग आ चुके हैं कशमकश ज़िन्दगी से हम - साहिर लुधियानवी

तंग आ चुके हैं कशमकश ज़िन्दगी से हम ठुकरा न दें जहां को कहीं बेदिली से हम लो, आज हमने तोड़ दिया रिश्ता-ए-उम्मीद लो, अब कभी गिला न करेंगे...

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लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में - बहादुर शाह ज़फर
लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में - बहादुर शाह ज़फर

लगता नहीं है दिल मेरा उजड़े दयार में किसकी बनी है आलम-ए-ना-पाएदार में कह दो न इन हसरतो से कही और जा बसे इतनी जगह कहा है दिन –ए-दागदार मे...

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सीखी नई ज़बान, वतन से जुदा हुए  - सलमान अख्तर
सीखी नई ज़बान, वतन से जुदा हुए - सलमान अख्तर

सीखी नई ज़बान, वतन से जुदा हुए जीने की दौड़-धुप में हम क्या से क्या हुए फुटपाथ पर पड़े थे तो खाते थे ठोकरें मंदिर में आके बैठ गए और खुदा...

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आँख को जाम लिखो ज़ुल्फ को बरसात लिखो -  निदा फाजली
आँख को जाम लिखो ज़ुल्फ को बरसात लिखो - निदा फाजली

निदा  फाजली साहब को जन्मदिन की हार्दिक बधाई | आप सभी के लिए उनकी यह गज़ल आँख को जाम लिखो ज़ुल्फ को बरसात लिखो जिस से नाराज हो उस शख्स की ह...

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न हो शोहरत तो गुमनामी का भी खतरा नहीं होता  - अहमद वसी
न हो शोहरत तो गुमनामी का भी खतरा नहीं होता - अहमद वसी

न हो शोहरत तो गुमनामी का भी खतरा नहीं होता बहुत मशहूर होना भी बहुत अच्छा नहीं होता, फसादों,हादसों,जंगो में ही हम एक होते है कोई आफत ना ...

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आवाज़ दो हम एक हैं  - जाँ निसार अख़्तर
आवाज़ दो हम एक हैं - जाँ निसार अख़्तर

एक है अपनी ज़मीं ,एक है अपना गगन एक है अपना जहाँ, एक है अपना वतन अपने सभी सुख एक हैं, अपने सभी ग़म एक हैं आवाज़ दो हम एक हैं ये वक़्त ...

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गांधीजी के जन्मदिन पर -दुष्यंत कुमार
गांधीजी के जन्मदिन पर -दुष्यंत कुमार

मैं फिर जनम लूँगा फिर मैं इसी जगह आऊँगा उचटती निगाहों की भीड़ में अभावों के बीच लोगों की क्षत-विक्षत पीठ सहलाऊँगा लँगड़ाकर चलते हुए प...

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दिल नहीं मिलता सरो-बाज़ार मिल गया - अज़हर साबरी
दिल नहीं मिलता सरो-बाज़ार मिल गया - अज़हर साबरी

दिल नहीं मिलता सरो-बाज़ार मिल गया इस कौम की कफस में क्या करार मिल गया चाहा था एक लम्हा खुशी का बा-अदब बद-किस्मती से दर्द का संसार मिल गया...

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 दाना मांझी की पत्नी की शव यात्रा - सीताराम गुप्ता
दाना मांझी की पत्नी की शव यात्रा - सीताराम गुप्ता

यह कविता हमें सीताराम गुप्ता जी ने भेजी है पीतमपुरा दिल्ली से हाँ बहुत गरीब है दाना मांझी इसलिए धोनी पड़ रही है उसे पत्नी की लाश ...

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कब आती है कब जाती है सारा हिसाब रखते हैं लोग - डॉ. मधुसूदन चौबे
कब आती है कब जाती है सारा हिसाब रखते हैं लोग - डॉ. मधुसूदन चौबे

कब आती है कब जाती है सारा हिसाब रखते हैं लोग यहाँ, हर लड़की के लिए एक ही ख्वाब रखते हैं लोग आदम से आज तक एक जैसी नजर आती है तवारीख काले...

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इताब-ओ-क़हर का हर इक निशान बोलेगा - ज़की तारिक़
इताब-ओ-क़हर का हर इक निशान बोलेगा - ज़की तारिक़

इताब-ओ-क़हर का हर इक निशान बोलेगा मैं चुप रहा तो शिकस्ता मकान बोलेगा अभी हुजूम है उस को जुलूस बनने दे तिरे ख़िलाफ़ हर इक बे-ज़बान बोलेग...

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खुदगर्ज़ दुनिया में आखिर क्या करें - अनवर जलालपुरी
खुदगर्ज़ दुनिया में आखिर क्या करें - अनवर जलालपुरी

खुदगर्ज़ दुनिया में आखिर क्या करें क्या इन्हीं लोगों से समझौता करें शहर के कुछ बुत ख़फ़ा हैं इस लिये चाहते हैं हम उन्हें सजदा करें चन...

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थाम दामन उन्हें हम बिठाते रहे - महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश
थाम दामन उन्हें हम बिठाते रहे - महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश

थाम दामन उन्हें हम बिठाते रहे ज़ुल्फ़ झटकाए वो दूर जाते रहे जब तबीयत ज़रा तल्ख़ उनकी हुई हैं गुनाहगार हम ये बताते रहे बारहा तोड़ना प्यार क...

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किसने ऐसा किया इशारा था - डॉ. ज़िया उर रहमान जाफ़री
किसने ऐसा किया इशारा था - डॉ. ज़िया उर रहमान जाफ़री

किसने ऐसा किया इशारा था खत मेरा था पता तुम्हारा था तुम ये कहते हो भूल जाऊ मै तुमने चेहरा मेरा उतारा था काम आई फिर अपनी ताकत ही कोई क...

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पहला सा वो ज़मीं का न वो आसमां का रंग  - मुरलीधर शाद
पहला सा वो ज़मीं का न वो आसमां का रंग - मुरलीधर शाद

पहला सा वो ज़मीं का न वो आसमां का रंग दो दिन में ही बदल गया सारे जहा का रंग तेवर ही और हो गए अपने पराए के किस-किस का अब गिला हो की बदला ...

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वो जो मुह फेर कर गुजर जाए - मजरूह सुल्तानपुरी
वो जो मुह फेर कर गुजर जाए - मजरूह सुल्तानपुरी

वो जो मुह फेर कर गुजर जाए हश्र का भी नशा उतर जाए अब तो ले ले जिन्दगी यारब क्यों ये तोहमत भी अपने सर जाए आज उठी इस तरह निगाहें करम जै...

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जो बात है हद से बढ़ गयी है -फ़िराक गोरखपुरी
जो बात है हद से बढ़ गयी है -फ़िराक गोरखपुरी

जो बात है हद से बढ़ गयी है वाएज़ के भी कितनी चढ़ गई है हम तो ये कहेंगे तेरी शोख़ी दबने से कुछ और बढ़ गई है हर शय ब-नसीमे-लम्से-नाज़ुक...

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पहले सौ बार इधर और उधर देखा है - मजरूह सुल्तानपुरी
पहले सौ बार इधर और उधर देखा है - मजरूह सुल्तानपुरी

पहले सौ बार इधर और उधर देखा है तब कहीं डर के तुम्हें एक नज़र देखा है हम पे हँसती है जो दुनियाँ उसे देखा ही नहीं हम ने उस शोख को ऐ दीदा...

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दर्दे-दिल, दर्दे-वफ़ा, दर्दे-तमन्ना क्या है  - जाँ निसार अख़्तर
दर्दे-दिल, दर्दे-वफ़ा, दर्दे-तमन्ना क्या है - जाँ निसार अख़्तर

दर्दे-दिल, दर्दे-वफ़ा, दर्दे-तमन्ना क्या है आप क्या जानें मोहब्बत का तकाज़ा क्या है बेमुरव्वत बेवफ़ा बेगाना-ए-दिल आप हैं आप माने या न माने...

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न मै कंघी बनाता हूँ, न मै चोटी बनाता हूँ - मुनव्वर राना
न मै कंघी बनाता हूँ, न मै चोटी बनाता हूँ - मुनव्वर राना

न मै कंघी बनाता हूँ, न मै चोटी बनाता हूँ ग़ज़ल मै आप बीती को मै जग बीती बनाता हूँ ग़ज़ल वो सिंफे-नाजुक है जिसे अपनी रफाक़त से वो महबूबा बना...

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जश्न-ए-आजादी  - फय्याज ग्वालयरी
जश्न-ए-आजादी - फय्याज ग्वालयरी

आप सभी को जश्ने आज़ादी ( स्वतंत्रता दिवस / Independence Day) की शुभकामनाए | आज़ादी के जश्न पर आप सभी के लिए फय्याज ग्वालियरी साहब की जश्ने-आज़ा...

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उदासियो ने मेरी आत्मा को घेरा है - मीना कुमारी नाज़
उदासियो ने मेरी आत्मा को घेरा है - मीना कुमारी नाज़

मीना कुमारी जी के जन्मदिन के अवसर पर उनकी यह ग़ज़ल पेश है | आशा आप सभी को पसंद आएगी उदासियो ने मेरी आत्मा को घेरा है रुपहली चांदनी है और घु...

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खुश्क मौसम रूत सुहानी ले गया - चाँद शेरी
खुश्क मौसम रूत सुहानी ले गया - चाँद शेरी

चाँद शेरी साहब के जन्मदिन के मौके पर उनकी यह गज़ल पेश है खुश्क मौसम रूत सुहानी ले गया चहचहाती जिंदगानी ले गया मंदिरों का, मस्जिदों का आ...

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मुझसे मत कर यार कुछ गुफ्तार, मै रोज़े से हूँ - ज़मीर जाफ़री
मुझसे मत कर यार कुछ गुफ्तार, मै रोज़े से हूँ - ज़मीर जाफ़री

रमज़ान का पाक़ महीना चल रहा है कुछ दिनों में ईद आ जायेगी इस रमज़ान के मौके पर आप सभी के लिए पकिस्तान के मशहूर हास्य व्यंग्य शायर सय्यद ज़म...

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गुनाहगार हूँ उसका जिसपे हरकत उबाल रखा है - अज़हर साबरी
गुनाहगार हूँ उसका जिसपे हरकत उबाल रखा है - अज़हर साबरी

गुनाहगार हूँ उसका जिसपे हरकत उबाल रखा है उकुबत के बावजूद भी सबका ख्याल रखा है हर पहलु को नज़र-अंदाज उसने किया फ़हम के साथ वो है मेरी बी...

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ऊँचा है पर्वत - अशोक बाबू माहौर
ऊँचा है पर्वत - अशोक बाबू माहौर

  ऊँचा है पर्वत कद उसका ऊँचा न झुका न झुकेगा अटल हैं इरादे विश्वास के अम्बार खड़ा मूक अविचल बनकर स्तम्भ सा सीना ताने | हवाए...

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आसमाँ मिल न सका, धरती पे आया न गया - इमरान हुसैन आज़ाद
आसमाँ मिल न सका, धरती पे आया न गया - इमरान हुसैन आज़ाद

आसमाँ मिल न सका, धरती पे आया न गया ज़िन्दगी हमसे कोई ठौर बनाया न गया घर की वीरानियाँ रुसवा हुईं बेकार में ही मुझसे बाज़ार में भी वक़्त ब...

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 नाशाद हूँ पहले ही अब दिल न दुखाओ तुम - महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश
नाशाद हूँ पहले ही अब दिल न दुखाओ तुम - महेश चन्द्र गुप्त ख़लिश

नाशाद हूँ पहले ही अब दिल न दुखाओ तुम इस रक्से-मुहब्बत से मत और रिझाओ तुम भूला न अभी तक हूँ अंजाम मुहब्बत का नग़मा-ए- वफ़ा गा कर फिर से ...

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बाबूजी - आलोक श्रीवास्तव
बाबूजी - आलोक श्रीवास्तव

बड़ी मशहूर ग़ज़ल है आलोक श्रीवास्तव जी की बाबूजी आप सबके लिए पेश है : घर की बुनियादें, दीवारें, बामो-दर थे बाबूजी सबको बांधे रखने वाला ख़ास...

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होंठ सींकर जख्म मेरे अधखुले से रह गये - कमलेश संजीदा
होंठ सींकर जख्म मेरे अधखुले से रह गये - कमलेश संजीदा

होंठ सींकर जख्म मेरे अधखुले से रह गये दिल की उस वेदना को भी बस सीने में दबाकर रह गये दूसरों के जख्म सींकर खुद के इतने उघड गये ढकने को तो...

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हमारा देश - इब्ने इंशा
हमारा देश - इब्ने इंशा

आज इब्ने इंशा जी का जन्म दिवस आज याने १५ जून को है इस मौके पर उनकी यह रचना पेश है आशा है आपको यह पसंद आएगी " ईरान में कौन रहता है? &...

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इश्क़ का रोग भला कैसे पलेगा मुझसे - प्रखर मालवीय 'कान्हा'
इश्क़ का रोग भला कैसे पलेगा मुझसे - प्रखर मालवीय 'कान्हा'

इश्क़ का रोग भला कैसे पलेगा मुझसे क़त्ल होता ही नहीं यार अना का मुझसे गर्म पानी की नदी खुल गयी सीने पे मेरे कल गले लग के बड़ी देर वो रोय...

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