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साल की आख़िरी रात- ज़िया फ़तेहाबादी
साल की आख़िरी रात- ज़िया फ़तेहाबादी

नया  साल 2016 आने वाला है इस मौके पर पेश है मेहर लाल सोनी जिया फतेहाबादी साहब की एक नज्म साल की आख...

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 किससे बिछड़ी कौन मिला था भूल गई - फ़ातिमा हसन
किससे बिछड़ी कौन मिला था भूल गई - फ़ातिमा हसन

किससे बिछड़ी कौन मिला था भूल गई कौन बुरा था कौन था अच्छा भूल गई कितनी बातें झूठी थीं और कितनी सच जितने भी लफ़्जों को परखा भूल गई चारो...

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तमन्नाओं की पामाली रहेगी - असलम इलाहाबादी
तमन्नाओं की पामाली रहेगी - असलम इलाहाबादी

तमन्नाओं की पामाली रहेगी जलेंगे अश्क दिवाली रहेगी कमी कोई नहीं है दोस्तों की मगर तेरी जगह खाली रहेगी हजारों चाँद चमके भी तो क्या है ...

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अब हिन्दू भी खतरे में है - निदा फ़ाज़ली
अब हिन्दू भी खतरे में है - निदा फ़ाज़ली

अपनी तरह से बोलने वाला अपनी तरह से सोचने वाला अपनी तरह से अपने घर के दरवाजो को खोलने वाला अपनी तरह से लिखने वाला टीवी पर अपने चेहरे-...

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