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आग बुझने लगी है दरिया पार - मुजफ्फर हनफ़ी
आग बुझने लगी है दरिया पार - मुजफ्फर हनफ़ी

आग बुझने लगी है दरिया पार दर्द कर देगा आज बेड़ा पार इश्क़ में मर के जी गये हम तो मौत से वर्ना किसने पाया पार यही नक़्शा है उस तरफ़ यारो ...

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आशना हो तो आशना समझे - बहादुर शाह ज़फर
आशना हो तो आशना समझे - बहादुर शाह ज़फर

आशना हो तो आशना समझे हो जो नाआशना, तो क्या समझे हम इसी को भला समझते है आपको जो कोई बुरा समझे वस्ल है, तू जो समझे, से वस्ल तू जुदा है...

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शहरे वफ़ा का आज ये कैसा रिवाज है - चाँद शेरी
शहरे वफ़ा का आज ये कैसा रिवाज है - चाँद शेरी

शहरे वफ़ा का आज ये कैसा रिवाज है मतलब परस्त अपनों का खालिस मिजाज़ है फुटपाथ से गरीबी ये कहती है चीख कर क्यू भूख और प्यास का मुझ पर ही रा...

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