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है गलत गर गुमान में कुछ है - ख्वाजा मीर दर्द
है गलत गर गुमान में कुछ है - ख्वाजा मीर दर्द

है गलत गर गुमान में कुछ है तुझ सिवा भी जहान में कुछ है दिल भी तेरे ही ढंग सिखा है आन में कुछ है ...

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शाम का वक्त है शाख़ों को हिलाता क्यू है ? - कृष्ण कुमार नाज़
शाम का वक्त है शाख़ों को हिलाता क्यू है ? - कृष्ण कुमार नाज़

शाम का वक्त है शाख़ों को हिलाता क्यू है ? तू थके मांदे परिन्दों को उड़ाता क्यू है ? वक्त को कौन भ...

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अहमद फ़राज़ एक महान शायर
अहमद फ़राज़ एक महान शायर

अ हमद फ़राज़,  शायरी को पढ़ने और समझने वाला शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा जो इस नाम से परिचित नहीं होगा | आ...

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उसके हम बंदे है साहिब! जिसका साया ही नहीं - हबीब कैफी
उसके हम बंदे है साहिब! जिसका साया ही नहीं - हबीब कैफी

क्या हुआ जो बात करना हमको आया ही नहीं फिर भी चेहरे पर कोई चेहरा लगाया ही नहीं आप तो क्या चीज़ है प...

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एक बंदा है मगर उसके ख़ुदा हैं कितने -रौशन नगीनवी
एक बंदा है मगर उसके ख़ुदा हैं कितने -रौशन नगीनवी

दाम फ़ैलाये हुए हिर्सो-हवा हैं कितने एक बंदा है मगर उसके ख़ुदा हैं कितने इक-इक ज़र्रे में पोशीदा हैं...

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झूठ कैसे हलक से उतरे - मुनव्वर राना
झूठ कैसे हलक से उतरे - मुनव्वर राना

झूठ कैसे हलक से उतरे निवाले की तरह मेरी गैरत चीखती है मुह के छाले की तरह प्यास की शिद्दत से मुह खोले परिंदा गिर पड़ा सीढियों पर हाफ्ते अ...

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