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Krishna Janmashtami
कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर आप सभी को हार्दिक बधाईयाँ
इस अवसर पर गुलज़ार साहब कि एक नज्म पेश है पढ़िए और लुत्फ़ लीजिए

चिपचिपे दूध से नहलाते है
आँगन में खड़ा कर के तुम्हे |
शहद भी, तेल भी, हल्दी भी, न जाने क्या क्या
घोल के सर पे लुढाते है गिलसिया भर के...

औरते गाती है जब तीव्र सुरों में मिल कर,
पाँव पर पाँव लगाये खड़े रहते हो
इक पथराई सी मुस्कान लिए

बुत नहीं हो तो, परेशानी तो होती होगी

जब धुआँ देता, लगातार पुजारी
घी जलाता है कई तरह के छोके देकर
इक जरा छीक ही दो तुम,
तो यकीं आए कि सब देख रहे हो !!! - गुलज़ार

Roman

chipchipe dudh se nahlate hai
aangan me khada kar ke tumhe
shahad bhi, tel bhi, haldi bhi, n jaane kya-kya
ghol ke sar pe ludhate hai gilsiya bhar ke...

aurate gati hai jab tivr suro me mil kar,
panv par panv lagaye khade rahte ho
ik pathrai si muskan liye

but nahi ho to, pareshani to hoti hogi

jab dhuaan deta, lagatar pujari
ghi jalata hai kai tarah ke chhoke dekar
ik jara chhik hi do tum,
to yakeen aaye ki sab dekh rahe ho!!! - Gulzar
#jakhira

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  1. बहुत खूब ... गुलज़ार साहब की क्या बात ...

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    1. दिगम्बर जे कुछ अलग गुलज़ार ही लिख सकते है

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