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स्वतंत्रता दिवस की आप सबको हार्दिक बधाई

सरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जाँ कहते हैं
हम जो इस मुल्क की मिट्टी को भी माँ कहते हैं

हम पे जो बीत चुकी है वो कहाँ लिखा है
हम पे जो बीत रही है वो कहाँ कहते हैं

वैसे ये बात बताने की नहीं है लेकिन
हम तेरे इश्क़ में बरबाद हैं हाँ कहते हैं

तुझको ऐ ख़ाक-ए-वतन मेरे तयम्मुम की क़सम
तू बता दे जो ये सजदों के निशाँ कहते हैं

आपने खुल के मुहब्बत नहीं की है हमसे
आप भाई नहीं कहते हैं मियाँ कहते हैं

शायरी भी मेरी रुस्वाई पे आमादा है
मैं ग़ज़ल कहता हूँ सब मर्सिया-ख़्वाँ कहते हैं - मुनव्वर राना
मायने
दुश्मन-ए-जां = जान का दुश्मन, ख़ाक-ए-वतन = देश कि मिटटी, तयम्मुम =खुद को पवित्र करने हेतु मिटटी को चेहरे और हाथो पर विशेष तरीके से लगाना,

Roman

sirfire log hame dushman-e-jaa kahte hai
ham jo is mulk ki mitti ko bhi maa kahte hai

ham pe jo beet chuki hai wo kaha likha hai
ham pe jo beet rahi hai wo kaha kahte hai

waise ye baat batane ki nahi hai lekin
ham tere ishq me barbad hai haa kahte hai

tujhko ae khak-e-watan tere taymmum ki kasam
tu bata de jo ye sajdo ke nishaan kahte hai

aapne khul ke muhbbat nahi ki hai hamse
aap bhai nahi kahte hai miyaan kahte hai

shayari bhi meri ruswai pe aamada hai
mai ghzal kahta hu sab marsiya-khwaan kahte hai - Munwwar Rana
#jakhira

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