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जो हो सकता है इस से वो किसी से हो नहीं सकता
मगर देखो तो फिर कुछ आदमी से हो नहीं सकता

न रोना है तरीके का न हसना है सलीके का
परेशानी में कोई काम जी से हो नहीं सकता

किया है वाद-ए-फर्दा उन्होंने देखिये क्या हो
यहाँ सब्रो-तहम्मुल आज ही से हो नहीं सकता

खुदा जब दोस्त है ऐ दाग क्या दुश्मन से अंदेशा
हमारा कुछ किसी की दुशमनी से हो नहीं सकता - दाग देहलवी
मायने
वाद-ए-फर्दा=कल का वादा, सब्रो-तहम्मुल=सब्र/धीरज, अंदेशा=डर

Roman

jo ho sakta hai is se wo kisi se ho nahi sakta
magar dekho to phir kuch aadmi se ho nahi sakta

na rona hai tarike ka n hasna hai salike ka
pareshani me koi kaam ji se ho nahi sakta

kiya hai waad-ae-farda unhone dekhiye kya ho
yaha wabro-tahmmul aaj hi se ho nahi sakta

khuda jab dost ho ae daag kya dushaman se andesha
hamara kuch kisi ki dushmani se ho nahi sakta - Daag Dehlavi
#jakhira

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