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क्या हुआ जो बात करना हमको आया ही नहीं
फिर भी चेहरे पर कोई चेहरा लगाया ही नहीं

आप तो क्या चीज़ है पत्थर पिघल जाते है जनाब
गीत कोई दिल से अब तक हमने गाया ही नहीं

रोज आता है यहाँ वो रात के पिछले पहर
नींद से लेकिन कभी उसने जगाया ही नहीं

मुस्कुराया वो मेरे कुछ पूछने पर इस तरह
कुछ बताया भी नहींलेकिन छुपाया भी नहीं

क्या डराएगा कोई साया हमें "कैफी" यहाँ
उसके हम बंदे है साहिब! जिसका साया ही नहीं - हबीब कैफी

Roman

kya hua jo baat karna hamko aaya hi nahi
phir bhi chehre par koi chehra lagaya hi nahi

aap to kya cheez hai patthar pighal jate hai janab
geeet koi dil se ab tak hamne gaya hi nahi

roj aata hai yaha wo raat ke pichle pahar
nind se lekin kabhi usne jagaya hi nahi

muskuraya wo mere kuch puchne par is tarah
kuch bataya bhi nahi lekin chupaya bhi nahi

kya darayega koi saya hame "Kaifi" yaha
uske ham bande hai sahib! jiska saya hi nahi - Habib Kaifi
#jakhira

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