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दाम फ़ैलाये हुए हिर्सो-हवा हैं कितने
एक बंदा है मगर उसके ख़ुदा हैं कितने

इक-इक ज़र्रे में पोशीदा हैं कितने ख़ुर्शीद
इक-इक क़तरे में तूफ़ान बपा हैं कितने

चंद हँसते हुए फूलों का चमन नाम नहीं
गौर से देख की पामाले-सबा हैं कितने

उनसे नाकर्दा ज़फ़ाओं का किया था इसरार
इतनी सी बात पे वो हमसे ख़फ़ा हैं कितने

गामज़न हो के ये उक़्दा तो खुला है 'रौशन'
रहज़न कितने हैं और रहनुमा हैं कितने -  रौशन नगीनवी

मायने 
दाम =जाल ;हिर्सो-हवा=लोभ और लालच ;पोशीदा =छिपे हुए ; ख़ुर्शीद =सूरज ;बपा=उपस्थित;पामाले-सबा=हवा के पाँव तले रौंदे हुए ;नाकर्दा ज़फ़ाओं=न किये हुए अत्याचार ;इसरार =हठ ; गामज़न =चलता हुआ ; उक़्दा =गुत्थी /उलझा

Roman

dam failaye hue hurso-hawa hai kitne
ek banda hai magar uske khuda hai kitne

ik-ik zarre me poshida hai kitne khurshid
ik-ik katre me tufan bapa hai kitne

chand haste huye fulo ka chaman naam nahi
gour se dekh ki pamale-saba hai kitne

unse nakrda zafao ka kiya tha israr
itni si bat pe wo hamse khafa hai kitne

gamzan ho ke ye ukda to khula hai "Roushan"
rahjan kitne hai aur rahnuma hai kitne - Roushan Naginvi
#jakhira

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