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मजाज़ साहब की एक ऐसी नज़्म जिसे महात्मा गांधी भी पसंद करते थे और मजाज़ ने उनके सामने यह नज्म पढ़ी थी ।
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एक नन्ही मुन्नी सी पुजारन
पतली बाहें, पतली गर्दन

भोर भये मंदिर आई है
आई नहीं है, माँ लायी है

वक़्त से पहले जाग उठी है
नींद भी आँखों में भरी है

ठोड़ी तक लट आयी हुई है
यूँही सी लहराई हुई है

आँखों में तारों सी चमक है
मुखड़े पे चांदनी की झलक है

कैसी सुंदर है, क्या कहिये
नन्ही सी एक सीता कहिये

धुप चढ़े तारा चमका है
पत्थर पर एक फूल खिला है

चाँद का टुकडा फूल की डाली
कमसिन सीधी भोली-भाली

कान में चांदी की बाली है
हाथ में पीतल की थाली है

दिल में लेकिन ध्यान नहीं है
पूजा का कुछ ग्यान नहीं है

कैसी भोली और सीधी है
मंदिर की छत देख रही है

माँ बढ़ कर चुटकी लेती है
चुपके-चुपके हंस देती है

हँसना रोना उसका मजहब
उसको पूजा से क्या मतलब

खुद तो आई है मंदिर में
मन उसका है गुडिया घर में - मजाज़ लखनवी

Roman
ek nanhi munni si pujaran
patli bahe, patli gardan

bhor bhaye mandir aai hai
aai nahi, maa laayi hai

waqt se pahle jaag uthi hai
nind bhi aankho me bhari hai

thodi tak lat aayi hui hai
yu hi si lahrai hui hai

aankho me taro si chamak hai
mukhde pe chandni ki jhalak hai

kaisi sundar hai, kya kahiye
nanhi si ek sita kahiye

dhoop chade tara chamka hai
patthar par ek phool khila hai

chand ka tukda phool ki dali
kamsin sidhi bholi-bhali

kaan me chandi ki bali hai
haath me pital ki thali hai

dil me lekin dhyan nahi hai
pooja ka kuch gyan nahi hai

kaisi bholi aur sidhi hai
mandir ki chhat dekh rahi hai

maa badhkar chutki leti hai
chupke-chupke has deti hai

hasna rona uska majhab
usko pooja se kya matlab

khud to aai hai mandir me
man uska hai gudiya ghar me - Mazaz Lakhnavi
#jakhira

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  1. बहुत ही प्यारी रचना ! प्यारी सी नन्ही पुजारिन का बहुत ही खूबसूरत शब्द चित्र !

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  2. बहुत ही प्यारी सी सुन्दर रचना ...

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  3. दिल में लेकिन ध्यान नहीं है
    पूजा का कुछ ग्यान नहीं है

    कैसी भोली और सीधी है
    मंदिर की छत देख रही है

    माँ बढ़ कर चुटकी लेती है
    चुपके-चुपके हंस देती है

    हँसना रोना उसका मजहब
    उसको पूजा से क्या मतलब

    खुद तो आई है मंदिर में
    मन उसका है गुडिया घर में
    पहली बार पढ़ी है मैंने ! ऐसा लग रहा है जैसे मेरी बेटी के बारे में लिखा हो ! बहुत ही प्यारी सी रचना ! बहुत ही सुन्दर

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