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कलीम आजिज़ साहब का रविवार (15/02/2015) को हजारीबाग में इंतकाल हो गया खुदा उन्हें जन्नत नसीब करे | आपकी उम्र ९५ साल कि थी इस मौके पर श्रद्धांजलि स्वरूप उनकी यह गज़ल पेश है
मेरे ही लहू पर गुजर औकात करो हो
मुझ से ही अमीरों की तरह बात करो हो

दिन एक सितम, एक सितम रात करो हो
वो दोस्त हो दुश्मन को भी तुम मात करो हो

हम खाक-नशीं तुम सुखन-आरा-ए-सर-ए-बाम
पास आ के मिलो दूर से क्या बात करो हो

यु तो कभी मुंह फेर के देखो भी नहीं हो
जब वक्त पड़े है तो मुदारात करो हो

दामन पे कोई छिट न खंज़र पे कोई दाग़
तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो

बकने भी दो आजिज़ को जो बोले है बके है
दीवाना है दीवाने से क्या बात करो हो - कलीम आजिज़

Roman

mere lahu par gujar aukat karo ho
mujh se hi amiro ki tarah baat karo ho

din ek sitam, ek sitam raat karo ho
wo dost ho dushman ko bhi maat karo ho

ham khaak-nashin tum sukhan-aara-e-sar-e-baam
paas aa ke milo door se kya baat karo ho

yu to kabhi munh fer ke dekho bhi nahi ho
jab waqt pade hai to mudarat karo ho

daaman pe koi chhit n khanzar pe koi daag
tum katl karo ho ki karamat karo ho

bakne bhi do Aajiz ko jo bole hai, bake hai
deewana hai deewane se kya baat karo ho -Kaleem Aajiz
#jakhira

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