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साल की आख़िरी रात- ज़िया फ़तेहाबादी
साल की आख़िरी रात- ज़िया फ़तेहाबादी

नया  साल 2016 आने वाला है इस मौके पर पेश है मेहर लाल सोनी जिया फतेहाबादी साहब की एक नज्म साल की आखिरी रात ख़त्म होता है साल आ जाओ दूर कर...

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 किससे बिछड़ी कौन मिला था भूल गई - फ़ातिमा हसन
किससे बिछड़ी कौन मिला था भूल गई - फ़ातिमा हसन

किससे बिछड़ी कौन मिला था भूल गई कौन बुरा था कौन था अच्छा भूल गई कितनी बातें झूठी थीं और कितनी सच जितने भी लफ़्जों को परखा भूल गई चारो...

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तमन्नाओं की पामाली रहेगी - असलम इलाहाबादी
तमन्नाओं की पामाली रहेगी - असलम इलाहाबादी

तमन्नाओं की पामाली रहेगी जलेंगे अश्क दिवाली रहेगी कमी कोई नहीं है दोस्तों की मगर तेरी जगह खाली रहेगी हजारों चाँद चमके भी तो क्या है ...

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अब हिन्दू भी खतरे में है - निदा फ़ाज़ली
अब हिन्दू भी खतरे में है - निदा फ़ाज़ली

अपनी तरह से बोलने वाला अपनी तरह से सोचने वाला अपनी तरह से अपने घर के दरवाजो को खोलने वाला अपनी तरह से लिखने वाला टीवी पर अपने चेहरे-...

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दिल है आईना-ए-हैरत -आबिद हुसैन आबिद
दिल है आईना-ए-हैरत -आबिद हुसैन आबिद

दिल है आईना-ए-हैरत से दो-चार आज की रात ग़म-ए-दौराँ में है अक्स-ए-ग़म-ए-यार आज की रात आतिश-ए-गुल को दामन से हवा देती है दीदनी है रविश-ए-मौ...

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उसको कितना गुमान है यारो - डॉ. रौनक रशीद खान
उसको कितना गुमान है यारो - डॉ. रौनक रशीद खान

उसको कितना गुमान है यारो जैसे वो आसमान है यारो मेरी खामोशियो पे तंज न कर मेरे मुंह में भी जबान है यारो बात बिगड़ी हुई बनाता है रब बड़ा...

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आग बुझने लगी है दरिया पार - मुजफ्फर हनफ़ी
आग बुझने लगी है दरिया पार - मुजफ्फर हनफ़ी

आग बुझने लगी है दरिया पार दर्द कर देगा आज बेड़ा पार इश्क़ में मर के जी गये हम तो मौत से वर्ना किसने पाया पार यही नक़्शा है उस तरफ़ यारो ...

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आशना हो तो आशना समझे - बहादुर शाह ज़फर
आशना हो तो आशना समझे - बहादुर शाह ज़फर

आशना हो तो आशना समझे हो जो नाआशना, तो क्या समझे हम इसी को भला समझते है आपको जो कोई बुरा समझे वस्ल है, तू जो समझे, से वस्ल तू जुदा है...

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शहरे वफ़ा का आज ये कैसा रिवाज है - चाँद शेरी
शहरे वफ़ा का आज ये कैसा रिवाज है - चाँद शेरी

शहरे वफ़ा का आज ये कैसा रिवाज है मतलब परस्त अपनों का खालिस मिजाज़ है फुटपाथ से गरीबी ये कहती है चीख कर क्यू भूख और प्यास का मुझ पर ही रा...

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इक याद की मौजूदगी सह भी नहीं सकते  - साक़ी फारुकी
इक याद की मौजूदगी सह भी नहीं सकते - साक़ी फारुकी

इक याद की मौजूदगी सह भी नहीं सकते ये बात किसी और से कह भी नहीं सकते तू अपने गहन में है तो मैं अपने गहन में दो चांद हैं इक अब्र में रह भ...

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सुब्ह आँख खुलती है एक दिन निकलता है - हसन आबिदी
सुब्ह आँख खुलती है एक दिन निकलता है - हसन आबिदी

Hasan Abidi हसन आबिदी साहब पकिस्तान के मशहूर शायर और पत्रकार थे आपका जन्म 7 जुलाई 1929 को जौनपुर उ.प्र. में हुआ था और देश के बटवारे के ...

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चिपचिपे दूध से नहलाते है - गुलज़ार
चिपचिपे दूध से नहलाते है - गुलज़ार

कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर आप सभी को हार्दिक बधाईयाँ इस अवसर पर गुलज़ार साहब कि एक नज्म पेश है पढ़िए और लुत्फ़ लीजिए चिपचिपे दूध से नहलात...

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तादाद में हिन्दू न मुसलमान लिखे जाएं - राज़िक़ अंसारी
तादाद में हिन्दू न मुसलमान लिखे जाएं - राज़िक़ अंसारी

तादाद में हिन्दू न मुसलमान लिखे जाएं कितने है अपने गांव में इंसान लिखे जाएं दिल के तमाम ज़ख़्म भी रखना हिसाब में जिस रोज़ भी एहबाब के...

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गुज़र गए हैं जो मौसम कभी न आएँगे - आशुफ्ता चंगेजी
गुज़र गए हैं जो मौसम कभी न आएँगे - आशुफ्ता चंगेजी

गुज़र गए हैं जो मौसम कभी न आएँगे तमाम दरिया किसी रोज़ डूब जाएँगे सफ़र तो पहले भी कितने किये मगर इस बार ये लग रहा है के तुझ को भी भूल जाए...

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हकीम मोमिन खां ‘मोमिन’- डा. रंजन ज़ैदी
हकीम मोमिन खां ‘मोमिन’- डा. रंजन ज़ैदी

क हते है कि शायर जन्मजात शायर होता है. किन्तु उसकी शायरी उसके परिवेश और वातावरण से प्रभावित होती है, शायद कहीं तक सही भी हो | अरब के रेग...

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गुम जो यादों की डायरी हो जाए - राज़िक़ अंसारी
गुम जो यादों की डायरी हो जाए - राज़िक़ अंसारी

गुम जो यादों की डायरी हो जाए ख़ाली ख़ाली ये ज़िंदगी हो जाए आ चुका वक़्त गर जुदाई का काम ये भी हंसी ख़ुशी हो जाए आँसुओं के दिये जलाते च...

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कुछ आदमी से हो नहीं सकता - दाग देहलवी
कुछ आदमी से हो नहीं सकता - दाग देहलवी

जो हो सकता है इस से वो किसी से हो नहीं सकता मगर देखो तो फिर कुछ आदमी से हो नहीं सकता न रोना है तरीके का न हसना है सलीके का परेशानी में क...

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सरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जाँ कहते हैं - मुनव्वर राना
सरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जाँ कहते हैं - मुनव्वर राना

स्वतंत्रता दिवस की आप सबको हार्दिक बधाई सरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जाँ कहते हैं हम जो इस मुल्क की मिट्टी को भी माँ कहते हैं हम पे जो बी...

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दूर से आये थे साकी सुनके मयखाने को हम - नजीर अकबराबादी
दूर से आये थे साकी सुनके मयखाने को हम - नजीर अकबराबादी

दूर से आये थे साकी सुनके मयखाने को हम बस तरसते ही चले अफ़सोस पैमाने को हम मय भी है मीना भी है, सागर भी है साकी नहीं दिल में आता है लगा दे...

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जिंदगी में हमारी अगर दुशवारियाँ नहीं होती - कविता रावत
जिंदगी में हमारी अगर दुशवारियाँ नहीं होती - कविता रावत

आप भोपाल के रहने वाले है और अभी भोपाल के स्कूल में कार्यरत है ।  जिंदगी में हमारी अगर दुशवारियाँ नहीं होती हमारे हौसलों पर लोगों को हैरानिय...

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मोहब्बतो का शायर - शकील बदायुनी
मोहब्बतो का शायर - शकील बदायुनी

ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यों आज तेरे नाम पे रोना आया ये शेर कहने वाले शायर का नाम तो आप सबको पता ही होगा जी हा शकील बदायुनी...

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दुआओं की रात - मीना कुमारी नाज़
दुआओं की रात - मीना कुमारी नाज़

आज मीना कुमारी के जन्म दिवस के अवसर पर पेश है उनकी यह आज़ाद नज्म दुआओं की रात दुआओं की यह रात आज की रात 'बहुत रातो के बाद आई है'...

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मक़तल छोड़ के घर जाएं नामुमकिन है - राज़िक़ अंसारी
मक़तल छोड़ के घर जाएं नामुमकिन है - राज़िक़ अंसारी

राज़िक़ अंसारी साहब इंदौर के रहने वाले है आपने अपनी शायरी की शुरुवात सन 1985 में की थी आपका जन्म 1 अप्रैल 1960 को हुआ | मक़तल छोड़ के घर जा...

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बस यही तुझसे यार होना था - मोमिन खां मोमिन
बस यही तुझसे यार होना था - मोमिन खां मोमिन

गुस्सा बेगाना-वार होना था बस यही तुझसे यार होना था क्यों न होते अज़ीज़ गैर तुम्हे मेरी किस्मत में ख़्वार होना था मुझे जन्नत में वह सनम न ...

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अभी चुप रहो तुम, आवाम सो रहा है  - गुरप्रीत काफिऱ
अभी चुप रहो तुम, आवाम सो रहा है - गुरप्रीत काफिऱ

इंसानियत का कत्ल सरेआम हो रहा है, अभी चुप रहो तुम, आवाम सो रहा है । हो धरम या सियासत बस एक ही कहानी हाथों में छुरी ले के राम राम हो रहा ...

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आप से तुम, तुम से तू होने लगी- दाग देहलवी
आप से तुम, तुम से तू होने लगी- दाग देहलवी

रंज की जब गुफ्तगू होने लगी आप से तुम, तुम से तू होने लगी मेरी रुसवाई की नौबत आ गयी शोहरत उनकी कूबकू होने लगी अब के मिल के देखिये क्या ...

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उसका अंदाज है अभी तक लड़कपन वाला- कैफ भोपाली
उसका अंदाज है अभी तक लड़कपन वाला- कैफ भोपाली

आज ही के दिन 24 जुलाई 1991 को ठीक 24 साल पहले शायर कैफ भोपाली साहब इस दुनिया को अलविदा कह गए और अपनी यादो उनके मुरीदो के लिए छोड़ गए उनकी एक...

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गरीबे शहर का सर है - अहमद कमाल 'परवाजी'
गरीबे शहर का सर है - अहमद कमाल 'परवाजी'

गरीबे शहर का सर है के शहरयार का है ये हमसे पूछ के गम कौन सी कतार का है किसी की जान का, न मसला शिकार का है यहाँ मुकाबला पैदल से शहसवार क...

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बुजुर्गो कि बाते बेमानी नहीं है - रौनक रशीद खान
बुजुर्गो कि बाते बेमानी नहीं है - रौनक रशीद खान

बुजुर्गो कि बाते बेमानी नहीं है समझना उन्हें बस आसानी नहीं है मोहब्बत में बेताबियो का है आलम कभी रातभर नींद आनी नहीं है मेरे हौसलों क...

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करोगे याद तो - बशर नवाज
करोगे याद तो - बशर नवाज

उर्दू शायरी के बडे शायरो में शुमार किये जाने वाले शायर बशर नवाज साहब का 9 जुलाई 2015 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में निधन हो गया । आपका यह गी...

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एक जुग बाद शबे-गम की सहर देखी है - गोपाल दास नीरज
एक जुग बाद शबे-गम की सहर देखी है - गोपाल दास नीरज

एक जुग बाद शबे-गम की सहर देखी है देखने की न उम्मीद थी मगर देखी है जिसमे मजहब के हर एक रोग का लिखा है इलाज वो किताब हमने किसी रिंद के घर ...

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मेरा वो आशना था बहुत - चाँद शेरी
मेरा वो आशना था बहुत - चाँद शेरी

चाँद शेरी साहब के जन्मदिन के अवसर पर उनकी यह ग़ज़ल पेश है :- मेरा वो आशना था बहुत मुझसे लेकिन खफ़ा था बहुत ज़र्द पत्ते हरे हो गए बादलों मे...

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है गलत गर गुमान में कुछ है - ख्वाजा मीर दर्द
है गलत गर गुमान में कुछ है - ख्वाजा मीर दर्द

है गलत गर गुमान में कुछ है तुझ सिवा भी जहान में कुछ है दिल भी तेरे ही ढंग सिखा है आन में कुछ है आन में कुछ है बेखबर तेंगे-यार कहती है ...

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शाम का वक्त है शाख़ों को हिलाता क्यू है ? - कृष्ण कुमार नाज़
शाम का वक्त है शाख़ों को हिलाता क्यू है ? - कृष्ण कुमार नाज़

शाम का वक्त है शाख़ों को हिलाता क्यू है ? तू थके मांदे परिन्दों को उड़ाता क्यू है ? वक्त को कौन भला रोक सका है पगले, सूइयां घड़ियों की त...

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अहमद फ़राज़ एक महान शायर
अहमद फ़राज़ एक महान शायर

अ हमद फ़राज़,  शायरी को पढ़ने और समझने वाला शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा जो इस नाम से परिचित नहीं होगा | आपका जन्म पकिस्तान के (कोहत) नौशेरा शहर म...

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उसके हम बंदे है साहिब! जिसका साया ही नहीं - हबीब कैफी
उसके हम बंदे है साहिब! जिसका साया ही नहीं - हबीब कैफी

क्या हुआ जो बात करना हमको आया ही नहीं फिर भी चेहरे पर कोई चेहरा लगाया ही नहीं आप तो क्या चीज़ है पत्थर पिघल जाते है जनाब गीत कोई दिल से अ...

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एक बंदा है मगर उसके ख़ुदा हैं कितने -रौशन नगीनवी
एक बंदा है मगर उसके ख़ुदा हैं कितने -रौशन नगीनवी

दाम फ़ैलाये हुए हिर्सो-हवा हैं कितने एक बंदा है मगर उसके ख़ुदा हैं कितने इक-इक ज़र्रे में पोशीदा हैं कितने ख़ुर्शीद इक-इक क़तरे में तूफ़ान बपा...

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झूठ कैसे हलक से उतरे - मुनव्वर राना
झूठ कैसे हलक से उतरे - मुनव्वर राना

झूठ कैसे हलक से उतरे निवाले की तरह मेरी गैरत चीखती है मुह के छाले की तरह प्यास की शिद्दत से मुह खोले परिंदा गिर पड़ा सीढियों पर हाफ्ते अ...

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नन्ही पुजारन - मजाज़ लखनवी
नन्ही पुजारन - मजाज़ लखनवी

मजाज़ साहब की एक ऐसी नज़्म जिसे महात्मा गांधी भी पसंद करते थे और मजाज़ ने उनके सामने यह नज्म पढ़ी थी । From Google एक नन्ही मुन्नी सी पुजारन...

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चांदनी रात में कुछ भीगे ख़्यालों की तरह-फ़िरदौस ख़ान
चांदनी रात में कुछ भीगे ख़्यालों की तरह-फ़िरदौस ख़ान

चांदनी रात में कुछ भीगे ख़्यालों की तरह मैंने चाहा है तुम्हें दिन के उजालों की तरह साथ तेरे जो गुज़ारे थे कभी कुछ लम्हें मेरी यादों में च...

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मजदूरों का कोरस - कैफ भोपाली
मजदूरों का कोरस - कैफ भोपाली

आज मजदूर दिवस के मौके पर कैफ भोपाली साहब की एक नज्म पेश है या यूं कहे कोरस है " मजदूरों का कोरस " " Mazdooro ka Koras " ...

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जिस शहर में भी रहना उकताये हुए रहना - मुनीर नियाजी
जिस शहर में भी रहना उकताये हुए रहना - मुनीर नियाजी

बेचैन बहुत फिरना घबराये हुए रहना इक आग सी जज़बों की बहकाये हुए रहना छलकाये हुए चलना ख़ुश्बू लब-ए-लाली की इक बाग़ सा साथ अपने महकाये हुए...

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सितम देखो कि जो खोटा नहीं है- प्रखर मालवीय 'कान्हा'
सितम देखो कि जो खोटा नहीं है- प्रखर मालवीय 'कान्हा'

सितम देखो कि जो खोटा नहीं है चलन में बस वही सिक्का नहीं है नमक ज़ख्मों पे अब मलता नहीं है ये लगता है वो अब मेरा नहीं है यहाँ पर सिलसिला...

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सोचते हैं तो कर गुजरते हैं- परवीन फ़ना सैयद
सोचते हैं तो कर गुजरते हैं- परवीन फ़ना सैयद

सोचते हैं तो कर गुजरते हैं हम तो मंझधार में उतरते हैं मौत से खेलते हैं हम, लेकिन ग़ैर की बंदगी से डरते हैं जान अपनी तो है हमें भी अज़...

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सख्त हालातों में हम इंसान हो गए - नीरज अहूजा
सख्त हालातों में हम इंसान हो गए - नीरज अहूजा

सख्त हालातों में हम इंसान हो गए बुरा वक्त निकलते ही हम बेईमान हो गए जिसको भी देखा तेरी उल्फत के दरवाजे पर सभी के सभी अब भगवान हो गए मह...

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