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जिंदगी इस तरह गुजारते है - ज़हीर अब्बास
जिंदगी इस तरह गुजारते है - ज़हीर अब्बास

जिंदगी इस तरह गुजारते है कर्ज है और उसे उतारते है वस्ल पे शर्त बाँध लेते है और यह शर्त रोज हारते है आयनों में तो अक्स है खुद का लोग...

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कुछ तो रात का ग़म था लोगों कुछ मेरी तन्हाई थी- रुखसाना सिद्दीकी
कुछ तो रात का ग़म था लोगों कुछ मेरी तन्हाई थी- रुखसाना सिद्दीकी

कुछ तो रात का ग़म था लोगों कुछ मेरी तन्हाई थी दिल तो मेरा अपना ही था लेकिन प्रीत पराई थी अबके बरस ये कैसा मौसम कैसी रूत ये आई थी बाहर सा...

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राक्षस था न खुदा था पहले- निदा फाज़ली
राक्षस था न खुदा था पहले- निदा फाज़ली

राक्षस था न खुदा था पहले आदमी कितना बड़ा था पहले आसमां, खेत, समंदर, सब लाल खून कागज पे उगा था पहले मै वो मक्तूल जो क़ातिल न बना हाथ मे...

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खुद को क्यूँ जिस्म का ज़िन्दानी करें - अब्दुल अहद साज़
खुद को क्यूँ जिस्म का ज़िन्दानी करें - अब्दुल अहद साज़

खुद को क्यूँ जिस्म का ज़िन्दानी करें फिक्र को तख़्त-ए-सुलेमानी करें देर तक बैठ के सोचें खुद को आज फिर घर में बियाबानी करें अपने कमरे म...

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चलते-चलते रुका करे कोई -  परवेज़ वारिस
चलते-चलते रुका करे कोई - परवेज़ वारिस

चलते-चलते रुका करे कोई इक तमाशा खड़ा करे कोई सुस्त रफ़्तार हम नहीं लेकिन भीड़ इतनी है क्या करे कोई लुत्फ़ आये जो चांदनी में कभी बनके खुश...

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