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साहिर की शायरी
साहिर की शायरी

साहिर लुधियानवी 1940 से आज तक ज़हनों को चौंकाये रखने वाले शायर का नाम है। उनकी शायरी लोक चेतना में र...

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बस दो चार अफवाहें उड़ा दो -  अरमान खान
बस दो चार अफवाहें उड़ा दो - अरमान खान

बस दो चार अफवाहें उड़ा दो यहाँ जब चाहे दंगा करा दो रोटी-वोटी लोग भूल जायेंगे बस मंदिर-मस्जिद मुद...

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हर कदम नित नए सांचे में ढल जाते है लोग - हिमायत अली शायर
हर कदम नित नए सांचे में ढल जाते है लोग - हिमायत अली शायर

हर कदम नित नए सांचे में ढल जाते है लोग देखते ही देखते, कितने बदल जाते है लोग किसलिए कीजे किसी गुमगश्ता जन्नत की तलाश जबकि मिटटी के खिल...

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