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जगती रात अकेली सी लगे- अब्दुल अहद साज़
जगती रात अकेली सी लगे- अब्दुल अहद साज़

जगती रात अकेली सी लगे जिंदगी एक पहेली सी लगे रूप का रंग महल, ये दुनिया एक दिन सुनी हवेली सी लगे हमकलामी तिरी खुश आये इसे शायरी तेरी स...

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हर इंसान बराबर है - मुज़फ्फ़र हनफ़ी
हर इंसान बराबर है - मुज़फ्फ़र हनफ़ी

चीनी हो जापानी हो रूसी हो ईरानी हो बाशिंदा हो लंका का या वो हिंदुस्तानी हो सब का मान बराबर है हर इंसान बराबर है अनवर हो ...

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क्या लिखू क्या मंज़र है - रऊफ रज़ा
क्या लिखू क्या मंज़र है - रऊफ रज़ा

क्या लिखू क्या मंज़र है फूल के हाथ में पत्थर है ऐसी बारिश ऐसी हवा सारा गुस्सा मुझ पर है प्यासा है तो प्यास दिखा तू कोई पैगम्बर है दी...

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बस एक नूर झलकता हुआ नज़र आया- जगन्नाथ आज़ाद
बस एक नूर झलकता हुआ नज़र आया- जगन्नाथ आज़ाद

बस एक नूर झलकता हुआ नज़र आया फिर उसके बाद न जाने चमन पे क्या गुजरी मै काश तुमको अहले-वतन बता सकता वतन से दूर किसी बे-वतन पे क्या गुजरी ...

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मैंने देखा चेहरा चेहरा- महवर नूरी
मैंने देखा चेहरा चेहरा- महवर नूरी

मैंने देखा चेहरा चेहरा सबसे अच्छा तेरा चेहरा अपनी किस्मत में लिखा है दूर से तकते रहना चेहरा अच्छा लगता और ज्यादा उसका रूठा-रूठा चेहर...

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कुछ दिन तो बसो मेरी आँखों में- अब्दुल क़लीम
कुछ दिन तो बसो मेरी आँखों में- अब्दुल क़लीम

कुछ दिन तो बसो मेरी आँखों में फिर ख़्वाब अगर हो जाओ तो क्या कोई रंग तो दो मेरे चेहरे को फिर ज़ख़्म अगर महकाओ तो क्या इक आईना था सो टूट ग...

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अब वतन आज़ाद है- साहिर लुधियानवी
अब वतन आज़ाद है- साहिर लुधियानवी

अब कोई गुलशन ना उजड़े अब वतन आज़ाद है रूह गंगा की हिमालय का बदन आज़ाद है खेतियाँ सोना उगाएँ, वादियाँ मोती लुटाएँ आज गौतम की ज़मीं, तुलस...

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लिपट जाता हू माँ से और मौसी मुस्कुराती है- मुनव्वर राना
लिपट जाता हू माँ से और मौसी मुस्कुराती है- मुनव्वर राना

!!!आप सभी को रक्षाबंधन  की शुभकामनाए!!! लिपट जाता हू माँ से और मौसी मुस्कुराती है मै उर्दू मै ग़ज़ल कहता हू हिंदी मुस्कुराती है उछलते-ख...

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रोज कुर्ते ये कलफदार कहाँ से लाऊ- हसीब सोज़
रोज कुर्ते ये कलफदार कहाँ से लाऊ- हसीब सोज़

रोज कुर्ते ये कलफदार कहाँ से लाऊ तेरे मतलब का मै किरदार कहाँ से लाऊ दिन निकलता है तो सौ काम निकल आते है ऐ खुदा इतने मददगार कहाँ से लाऊ ...

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ए दिल तुझे हुआ क्या है
ए दिल तुझे हुआ क्या है

कई बरसो से यह बात चलती आ रही है कि आदमी को दिल से सोचना चाहिए या दिमाग से | और कहा जाता है दिल तो पागल है दिल का क्या है | कई वर्षों के बा...

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