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चलते-चलते रुका करे कोई
इक तमाशा खड़ा करे कोई

सुस्त रफ़्तार हम नहीं लेकिन
भीड़ इतनी है क्या करे कोई

लुत्फ़ आये जो चांदनी में कभी
बनके खुशबू मिला करे कोई

जिस्म पोशाक से झलकता हो
यूं न खुद को ढका करे कोई

हम तो मुरझाये शाम की सूरत
सुबह बनकर खिला करे कोई

सो गया है ये रास्ता थककर
अब न आवाजे-पा करे कोई

इतनी मुश्किल नहीं जुबां अपनी
कुछ तो समझे खुदा करे कोई - परवेज़ वारिस

मायने
आवाजे-पा=पैर की आहट, जुबां=भाषा

Roman

chalte chalte ruka kare koi
ik tamasha khada kare koi

sust raftaar ham nahi lekin
bhid itni hai kya kare koi

lutf aaye jo chandni me kabhi
banke khushbu mila kare koi

jism poshak se jhalkata ho
yun n khud ko dhaka kare koi

so gaya hai ye rasta thak kar
ab n aawaje-pa kare koi

itni mushkil nahi zubaan apni
kuch to samjhe khuda kare koi- Parvez Waris
#jakhira

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