0
कुछ दिन तो बसो मेरी आँखों में
फिर ख़्वाब अगर हो जाओ तो क्या

कोई रंग तो दो मेरे चेहरे को
फिर ज़ख़्म अगर महकाओ तो क्या

इक आईना था सो टूट गया
अब ख़ुद से अगार शरमाओ तो क्या

मैं तन्हा था मैं तन्हा हूँ
तुम आओ तो क्या न आओ तो क्या

जब हम ही न महके तो साहब
तुम बाद-ए-सबा कहलाओ तो क्या

जब देखने वाला कोई नहीं
बुझ जाओ तो क्या, जल जाओ तो क्या- अब्दुल क़लीम

Roman
Kuch din to baso meri aankho me
fir khwab agar ho jao to kya

koi rang to do mere chehre ko
fir jakhm agar mahkao to kya

ik aaina tha so tut gaya
ab khud se agar sharmao to kya

mai tanha tha, mai tanha hu
tum aao to kya, tum n aao to kya

jab ham hi n mahke to sahab
tum bad-e-saba kahlao to kya

jab dekhne wala koi nahi
bujh jao to kya, jal jao to kya- Abdul Kaleem/Qaleem

Post a Comment Blogger

 
Top