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Ameer Minai
सरकती जाये है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता-आहिस्ता
निकलता आ रहा है आफ़ताब आहिस्ता-आहिस्ता

जवाँ होने लगे जब वो तो हम से कर लिया पर्दा
हया यकलख़्त आई और शबाब आहिस्ता-आहिस्ता

शब-ए-फ़ुर्क़त का जागा हूँ फ़रिश्तों अब तो सोने दो
कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता-आहिस्ता

सवाल-ए-वस्ल पर उनको अदू का ख़ौफ़ है इतना
दबे होंठों से देते हैं जवाब आहिस्ता आहिस्ता

हमारे और तुम्हारे प्यार में बस फ़र्क़ है इतना
इधर तो जल्दी जल्दी है उधर आहिस्ता आहिस्ता

वो बेदर्दी से सर काटे 'अमीर' और मैं कहूँ उन से
हुज़ूर आहिस्ता-आहिस्ता जनाब आहिस्ता-आहिस्ता -अमीर मीनाई


Roman
Sarkati jaye hai rukh se naqab aahista-aahista
niklta aa rha hai aaftab aahista-aahista

jawaan hone lage jab wo to ham se kar liya parda
hayaa yaklakht aai aur shabab aahista-aahista

shab-e-furkat ka jaaga hu farishto ab to sone do
kabhi fursat me kar lena hisab aahista-aahista

sawal-e-wasl par unko adu ka khouf hai itna
dabe hotho se dete hai jawab aahista-aahista

hamare aur tumhare pyaar me bas fark hai itna
idhar to jaldi-jaldi hai udhar aahista-aahista

wo bedardi se sar kaate ameer aur mai kahu unse
hujur aahista-aahista janaab aahista-aahista - Ameer Minai

यह ग़ज़ल दीदार-ऐ-यार फिल्म में ली गयी है और ऋषि कपूर पर फिल्माई गयी है

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