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तेज हो धुप तो कुछ और निखर आयेंगे
हम कोई फुल नहीं है के जो मुरझाएंगे

नींद रूठे हुए लोगो को मना लाई है
आँख खोलूँगा तो ये फिर से बिछड जायेंगे

दे निशानी कोई ऐसी जो सदा याद रहे
जख्म कि बात ही क्या जख्म तो भर जायेंगे

कभी टूटे है न टूटेंगे दिलो के रिश्ते
तू न होगा तो तेरे दर्द को अपनाएंगे

अपने अल्फाज़ को सीने में छिपाए रखो
वरना ये भीड़ की आवाज़ में खो जायेंगे

उन्ही राहों से बशर अपना गुजर फिर होगा
फिर कोई ख्वाब निगाहों में बसा लायेंगे - बशर नवाज़

Roman

Tej ho dhoop to kuch aur nikhar jayenge
ham koi phool nahi hai ke jo murjhayenge

nind ruthe hue logo ko manaa layi hai
aankh kholunga to fir se bichhad jayenge

de nishani koi aisi jo sada yaad rahe
jakhm ki baat hi kya jakhm to bhar jayenge

kabhi tute hai n tutenge dilo ke rishte
tu n hoga to tere dard ko apnayenge

apne alfaz ko seene me chhipaye rakho
warna ye bhid ki aawaj me kho jayenge

unhi raaho se bashar apna gujar fir hoga
fir koi khwaab nigaho me basa layenge - Bashar Nawaz

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  1. नींद रूठे हुए लोगो को मना लाई है
    आँख खोलूँगा तो ये फिर से बिछड जायेंगे

    bahut khuub , lajavaab gazal .

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