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इश्क़ की मार बड़ी दर्दीली, इश्क़ में जी न फ़साना जी
सब कुछ करना इश्क़ न करना, इश्क़ से जान बचाना जी

वक़्त न देखे, उम्र न देखे, जब चाहे मजबूर करे
मौत और इश्क़ के आगे लोगो, कोई चले न बहाना जी

इश्क़ की ठोकर, मौत की हिचकी, दोनों का है एक असर
एक करे घर-घर रुस्वाई, एक करे अफ़साना जी

इश्क़ की नैमत फिर भी यारो, हर नैमत पर भारी है
इश्क़ की टीसे देन खुदा की, इश्क़ से क्या घबराना जी

इश्क़ की नजरो में सब यकसां, काबा क्या बुतखाना क्या
इश्क़ में दुनिया उक़बा क्या है, क्या अपना बेगाना जी

राह कठिन है पी के नगर की, आग पे चल कर जाना है
इश्क़ है सीढ़ी पी के मिलन की, जो चाहे तो निभाना जी

तर्ज बहुत दिन झेल चुके तुम, दुनिया की जंजीरो को
तोड़ के पिंजरे अब तो तुम्हे है देस पिया के जाना जी - गणेश बिहारी तर्ज

Roman

Ishq ki maar badi dardili, ishq m ji n fasana ji
sab kuch klarna ishq n karna, ishq se jaan bachana ji

waqt n dekhe, umr n dekhe, jab chahe majbur kare
mout aur ishq ke aage logo, koi chale n bahana ji

ishq ki thokar, mout ki hichki, dono ka hai ek asar
ek kare ghar-ghar ruswai, ek kare afsana ji

ishq ki naimat fir bhi yaao, har naimat par bhari hai
ishq ki tise den khuda ki, ishq se kya ghabrana ji

ishq ki najro me sab yaksaan, kaba kya butkhana kya
eshq me duniya ukbaan kya hai, kya apna begana ji

raah kathin hai pi ke nagar ki, aag pe chal kar jana hai
ishq hai sidhi pi ke milan ki, jo chahe to nibhana ji

tarz bahut din jhel chuke tum, duniya ki janjiro ko
tod ke pinjre ab to tumhe hai des piya ke jana ji- Ganesh Bihari Tarz

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