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होली के अवसर पर आप सभी को शुभकामनाए आपके लिये होली को थोडा सा आध्यात्मिक रूप देते हुए परवीन शाकिर की सलमा कृष्ण ग़ज़ल पेश है:-

तू राधा है अपने कृष्ण की
तेरा कोई भी होता नाम

मुरली तेरे भीतर बाजती
किसी बन करती विराम

या कोई सिंहासन बिराजती
तुझे खोज ही लेते श्याम

जिस संग भी फेरे डालती
संजोग में थे घनश्याम

क्या मोल तू मन का मांगती
बिकना था तुझे बेदाम

बंसी की मधुर तानो से
बसना था ये सूना धाम

तएरा रंग भी कौन सा अपना
मोहन का भी एक ही काम

गिरधर आकार भी गए और
मन माला है वही नाम

जोगन को पता भी क्या हो
कब सुबह हुई कब शाम- परवीन शाकिर

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