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Anwar Jalalpuri
कुछ यकीन कुछ गुमाँ की दिल्ली
अन-गिनत इम्तेहान की दिल्ली

मकबरे तक नहीं सलामत अब
थी कभी आन-बान की दिल्ली

ख़्वाब, किस्सा, ख्याल, अफसाना
हाए उर्दू जबान की दिल्ली

बे जबानी का हो गई है शिकार
असदुल्लाह खां की दिल्ली

अहले दिल इस को दिल समझते है
यह है हिन्दुस्तान की दिल्ली

कुछ यकीं कुछ गुमाँ की दिल्ली
अन-गिनत इम्तेहां की दिल्ली - अनवर जलालपुरी

Roman
kuch yakeen kuch gumaan ki Dilli
An-ginat imtehaan ki Dilli

makbare tak nahi salamat ab
thi kabhi aan-baan ki Dilli

khwab, kissam khyal, afsana
haye Urdu jabaan ki Dilli

be jabani ka ho gai hai shikar
Asdullah Khaan ki Dilli

ahle dil is ko dil samjhate hai
uah hai Hindustaan ki Dilli

kuch yakeen kuch gumaan ki Dilli
An-ginat imtehaan ki Dilli- Anwar Jalalpuri

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  1. बहुत खूब .. अब कहाँ वो दिल्ली और दिल्ली की गालियाँ ... सब हैं ख़्वाबों की बातें ...

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    1. सच कहा आपने आज के समय में दिल्ली की तबियत कुछ ठीक नहीं लगती |

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन समोसे के साथ चटनी फ्री नहीं रही,ऐसे मे बैंक सेवाएँ फ्री कहाँ - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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